उत्तराखंड के बाद अब गुजरात देश का वह प्रमुख राज्य बन गया है जिसने समान नागरिक संहिता (UCC) की दिशा में निर्णायक कदम उठा लिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार ने विधानसभा में भारी चर्चा और गहमागहमी के बीच UCC बिल को पारित कर दिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बिल पेश करते हुए इसे 'समानता और न्याय' का प्रतीक बताया। हालांकि, विपक्षी दलों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए विरोध किया, लेकिन संख्या बल के आधार पर सरकार ने इसे पारित करा लिया। गुजरात UCC बिल 2026 अब राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू होने की प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा. इस बिल के लागू होने से राज्य में कई व्यक्तिगत कानूनों का स्वरूप बदल जाएगा।
गुजरात UCC बिल की मुख्य बातें
- शादी, तलाक और पैतृक संपत्ति के लिए सभी धर्मों में एक समान कानून
- बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान हिस्सेदारी का अधिकार
- लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन
- जबरन शादी और बहुविवाह पर 7 साल तक की सजा
- कोर्ट के बाहर तलाक अमान्य, उल्लंघन पर 3 साल की सजा
- लिव-इन रजिस्ट्रेशन न कराने पर 3 महीने की सजा
- नाबालिग के साथ लिव-इन पर POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई
- कुछ समुदायों की परंपराओं (जैसे कजिन मैरिज) में कोई बदलाव नहीं
- आदिवासी समुदायों को बिल के दायरे से बाहर रखा गया
विपक्ष का विरोध
कांग्रेस ने बिल का पुरजोर विरोध किया. गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा कि बिल जल्दबाजी में लाया गया है. उन्होंने मांग की कि इसे पहले सिलेक्ट कमेटी को भेजा जाए. कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट भी किया. चावड़ा ने आरोप लगाया कि यह बिल विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर लाया गया है. समिति की रिपोर्ट सदन में नहीं पेश की गई और विधायकों से ठीक से चर्चा भी नहीं हुई.
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बिल पर अब आगे क्या?
सदन में बिल पर करीब 7.5 घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई. देर शाम वोटिंग के बाद बिल पास हो गया. सरकार इसे महिलाओं की सुरक्षा, समानता और राष्ट्रीय एकता की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है. गुजरात UCC बिल 2026 अब राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू होने की प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा. यह कानून पूरे गुजरात में लागू होगा और गुजरात के बाहर रहने वाले गुजरातवासियों पर भी लागू होगा.
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