ऑनलाइन पेमेंट करते समय ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसके लिए सरकार ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. सरकार ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल लेनदेन के दौरान लगने वाले किसी भी तरह के अतिरिक्त शुल्क का बोझ आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाना चाहिए. सरकारी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार ने देश के प्रमुख पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की है. इस बैठक में डिजिटल लेनदेन की मौजूदा व्यवस्था और जमीनी स्तर पर इसके क्रियान्वयन को लेकर गंभीर चर्चा हुई. सरकार का मुख्य जोर इस बात पर है कि नियमों के क्रियान्वयन में जो भी खामियां या कमियां हैं, उन्हें तुरंत दुरुस्त किया जाए ताकि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन न हो.

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उपभोक्ताओं की जेब पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त बोझ

बैठक में यह साफ निर्देश दिया गया है कि व्यापारी अपने हिस्से का चार्ज ग्राहकों से न वसूलें. अक्सर यह देखने में आता है कि कई जगहों पर मर्चेंट चार्ज या अन्य प्रोसेसिंग फीस को सीधे उपभोक्ता के बिल में जोड़ दिया जाता है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों को इस तरह से लागू किया जाएगा जिससे यह पूरी तरह सुनिश्चित हो सके कि व्यापारी यह चार्ज ग्राहकों पर न थोपें.

जमीनी स्तर पर होगी कड़ी निगरानी

सरकारी सूत्रों ने बताया कि नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की बेहद बारीकी से निगरानी की जाएगी. यदि नियमों के पालन में कहीं कोई कमी नजर आती है, तो उस गैप को तुरंत भरा जाएगा. सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल इंडिया की इस मुहिम में आम लोगों का भरोसा बना रहे और उन्हें बिना किसी अनुचित वित्तीय बोझ के सुरक्षित एवं पारदर्शी लेनदेन की सुविधा मिलती रहे.

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