जस्टिस वर्मा द्वारा अपने पद से इस्तीफा दिए जाने के बावजूद केंद्र सरकार उनके खिलाफ हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के मूड में है. जानकारी के अनुसार, अभी तक उनके इस्तीफे को मंजूरी नहीं मिली है.
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दरअसल, पूरा विवाद उस घटना के बाद शुरू हुआ था जब जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास पर आग लगने की घटना सामने आई थी. सूत्रों के अनुसार, आग बुझाने के दौरान बड़ी मात्रा में जले हुए नोट मिलने का मामला सामने आया, जिसके बाद पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और न्यायिक गलियारों में हलचल मचा दी थी. मामले को गंभीर मानते हुए इसकी जांच के लिए एक विशेष समिति गठित की गई थी.
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जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दी है. हालांकि रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि समिति ने मामले में लगे आरोपों और परिस्थितियों को गंभीर माना है.
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सूत्रों के अनुसार, सरकार आगामी मॉनसून सत्र में जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव संसद में ला सकती है. सरकार का मानना है कि इतने गंभीर मामले में केवल इस्तीफे के आधार पर कार्रवाई रोकना गलत संदेश दे सकता है.
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सरकारी सूत्रों का कहना है कि मोदी सरकार इस कार्रवाई के जरिए भ्रष्टाचार और जवाबदेही के मुद्दे पर “जीरो टॉलरेंस” का संदेश देना चाहती है. सरकार इसे संस्थागत पारदर्शिता और जवाबदेही से भी जोड़कर देख रही है.
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