साल 2026 का संसद मानसून सत्र खत्म होने में अब 2 ही दिन बाकी है और अभी तक की कार्रवाई का कुछ खास नतीजा नहीं मिला. ऐसे में सरकार का मकसद है कि विपक्ष के साथ उनका डेडलॉक खत्म हो जाए, ताकि Gen Z आंदोलन, राम मंदिर चंदा चोरी और फोरन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) पर बात हो सके. सूत्रों के मुताबिक, केंद्र ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के लिए कुथ शर्तें सामने रखी हैं. सरकार ने कहा है कि इस दौरान पंजाब और झारखंड में हुए विरोध प्रदर्शनों पर भी चर्चा होगी, जहां विपक्ष सत्ता में है.
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संसद में छात्र आंदोलन पर होगी चर्चा?
सूत्रों के हवाले से खबर ये भी है कि सरकार चाहती है कि इस मुद्दे पर सिर्फ औपचारिक बयान जारी ना करके, इस पर ठीक से चर्चा होनी चाहिए. केंद्र का कहना है कि अमित शाह के संसद में जवाब देने से पहले छात्र आंदोलन के मुद्दे पर विपक्ष सही तरीके से बातचीत करे. आपको बता दें कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी और युवाओं के विरोध प्रदर्शन के बाद से संसद की कार्यवाही एक दिन भी ठीक से नहीं चल पाई है. प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले दागे और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया. पुलिस की इस बर्बरता में कई प्रदर्शनाकरी घायल हुए. तभी से विपक्ष गृहमंत्री अमित शाह से जवाब मांग रहा है.
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- ”सवाल ये कभी नहीं था कि अमित शाह आकर संसद में भाषण देंगे. सवाल हमेशा यही था कि अमित शाह को ये साफ करना होगा कि दिल्ली में गोलीबारी की इजाज़त किसने दी थी.” कांग्रेस सांसद ने पीएम मोदी से भी छात्रों से माफी मांगने के लिए कहा है और राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर जवाबदेही तय करने को कहा है. राहुल गांधी ने जब तक ये मांगें पूरी नहीं हो जाती, तब तक संसद में डेडलॉक खत्म नहीं होगा. इसके अलावा, विपक्ष और सरकार के बीच FCRA बिल में संशोधन के प्रस्ताव पर भी पेंच फंसा है. इस बीच, सूत्रों के हवाले से खबरें ये भी हैं कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष को कहा कि सरकार इस बिल की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने को तैयार है. हालांकि FCRA को लेकर विपक्ष खुद बंटा हुआ है. विवाद की मुख्य वजह वो प्रावधान है जिसके तहत उन संगठनों के विदेशी योगदान और संपत्ति की निगरानी के लिए एक खास अथॉरिटी बनाने का प्रस्ताव है, जिनका FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है.
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