इन दिनों प्याज के दाम आसमान छू रहे हैं. प्याज की कीमतों में औसत से 59 प्रतिशत ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है. ऐसे में केंद्र सरकार ने थोक और खुदरा कीमतों को कम करने के लिए एक अनोखा कदम उठाया है. सरकार ने बफर स्टॉक से सप्लाई बढ़ाने के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ की शुरुआत की है, जो महाराष्ट्र के नासिक, दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि, मदुरै और गुवाहाटी जैसे 5 बड़े शहरों तक प्याज पहुंचा रही है. कांदा एक्सप्रेस के जरिए सोमवार को नासिक के लासलगांव से दिल्ली के लिए बफर स्टॉक से 800 टन से ज्यादा प्याज रवाना किया गया है.
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क्या है मकसद?
सरकार का मकसद है कि मंडियों में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में प्याज पहुंचाई जा सके ताकि प्याज की थोक कीमतें कम हो सकें. अभी प्याज की कीमत 55 रुपये किलो है, बुधवार को कांदा एक्स्प्रेस के दिल्ली पहुंचने पर सरकारी दर पर प्याज की बिक्री 35 रुपये प्रति किलोग्राम पर मुहैया कराई जाएगी. जैसे-जैसे प्याज की थोक कीमतें कम होंगी, वैसे-वैसे खुदरा दामों में भी कमी आ सकती है. सरकार का कहना है कि प्याज का स्टॉक ठीक-ठाक है, फिर भी कीमतों को कंट्रोल करने के लिए वो बाजार में दखल दे रही है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार हर वो मुमकिन कोशिश कर रही है, जिससे प्याज की बढ़ती कीमतों पर काबू पाया जा सके. सरकार कम कीमत पर प्याज मुहैया करवाने वाली है. केंद्र का कहना है कि कुछ कारोबारी जानबूझकर प्याज महंगे दामों में बेच रहे हैं, जिसकी वजह से कीमतों में इजाफा हो रहा है.
क्या है ‘कांदा एक्सप्रेस’?
प्याज की कीमतों को काबू करने के लिए सरकार ने कांदा एक्सप्रेस की शुरुआत की है, जो दिल्ली, चेन्नई कोच्चि, मदुरै और गुवाहाटी तक प्याज पहुंचाएगी. इसका मकसद बड़ी मात्रा में प्याज को सीधे बड़ी मंडियों तक पहुंचाना है, ताकि जिन जगहों पर कीमतों पर दबाव है, वहां प्याज का स्टॉक बढ़ाया जा सके. थोक सप्लाई को बेहतर बनाकर सरकार को उम्मीद है कि सप्लाई चेन के जरिए कीमतों को काबू में किया जा सकेगा और आखिरकार ग्राहकों को राहत मिलेगी. हाल ही में प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में प्याज की कोई कमी नहीं है. सरकार के अनुमान के मुताबिक, 2025-26 में प्याज का उत्पादन लगभग 307 लाख टन होने की उम्मीद है. ये पिछले साल के 308 लाख टन के उत्पादन के लगभग बराबर ही है.
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