राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में हो रहे एक कार्यक्रम के दौरान Gen Z और Gen Alpha के युवाओं से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के बारे में खुलकर अपनी बात रखी. RSS चीफ ने कहा- ''आंदोलन भी एक संवाद का माध्यम है. चेतना जगाने के लिए ऐसा करना सही है. भारत की शिक्षा में बहुत कुछ करने की जरूरत है. संवाद होना चाहिए, अगर बातचीत नहीं हो रही तो आगे की प्लानिंग कैसे होगी. मैं ये नहीं कहूंगा कि Gen Z को आंदोलन नहीं करना चाहिए. लेकिन ऐसा करने का भी एक सही तरीका है. बाबा साहेब ने जो संविधान लिखा है, उसे पढ़ना चाहिए.''
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'GenZ पर आंख बंदकर भरोसा'
भागवत का कहना है कि Gen Z और Gen Alpha, पुरानी पीढ़ी से भी ज्यादा देशभक्त और ईमानदार है. उन्होंने कहा- ''हमें उनकी बात सुननी चाहिए. उनसे बातचीत में कमी थी, इसीलिए जंतर-मंतर पर आंदोलन हुआ.'' मोहन भागवत ने आगे कहा- ''Gen Z अगर प्रोटेस्ट कर रहा है तो उसका मतलब वो एंटी नेशनल नहीं है. लेकिन संवाद होना चाहिए और उसमें अपनापन होना चाहिए.'' RSS प्रमुख ने कहा- अगर आंख मूंदकर विश्वास करने के लिए कहेंगे तो मैं Gen Z पर विश्वास करूंगा.''
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'शिक्षा का अधिकार सभी का है'
जब मोहन भागवत से स्कूलों में बुनियादी सुविधा के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा- ''शिक्षा का अधिकार सभी का है, सबको अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए. एजुकेशन सिस्टम सही होना चाहिए. शिक्षा के लिए सरकार के पास 6% बजट होना चाहिए. शिक्षा हम अगली पीढ़ी बनाने के लिए दे रहे हैं, पैसा कमाने के लिए नहीं.'' RSS प्रमुख ने कहा- ''देशभर में करीब एक करोड़ शिक्षक हैं, लेकिन वेकेंसी सिर्फ 10 लाख ही हैं. शिक्षा के लिए 6 प्रतिशत बजट की मांग सही है. मै इसका समर्थन करता हूं. बिना आंदोलन के 6 फीसदी का बजट दिया जा सकता है.
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'शिक्षा सिर्फ सरकार नहीं, सबकी ज़िम्मेदारी'
मोहन भागवत ने कहा- ''शिक्षा का समाधान सिर्फ एक कदम से नहीं होगा. मैं दो बातें कहना चाहूंगा. पहली- शिक्षा कमर्शियल बिजनेस नहीं होनी चाहिए. ये सबके लिए सुलभ हो और इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर मिलने चाहिए. दूसरी- शिक्षा सिर्फ सरकार की नहीं, हम सबकी जिम्मेदारी है.अपने-अपने स्तर पर भी योगदान दिया जा सकता है. मैंने ऐसे गांव देखे हैं, जहां लोगों ने मिलकर स्कूल की व्यवस्था सुधारी. कहीं पास के शहर के एक भले व्यक्ति ने स्कूल में कंप्यूटर लगवा दिए.'' जब RSS प्रमुख से पूछा गया कि अगर RSS महिलाओं को समाज में बराबर मानती है तो संघ में महिलाओं की भागीदारी क्यों नहीं दिखाई देती है. इसपर भागवत वे कहा- ''आज हमसे इस तरह के सवाल पूछे जाते हैं, लेकिन जब हमने संस्था शुरू की, उस समय इस तरह की परिस्थितियां नहीं थी कि हम महिलाओं को मौका देते.''
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