ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई फिल्म 'सतलुज' को लेकर केंद्र सरकार बेहद सख्त रुख अपना रही है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इस फिल्म की सामग्री की गहन जांच करने के लिए एक उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समिति का गठन कर दिया है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, फिलहाल यह पूरा मामला इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) के विचाराधीन है और फिल्म की बारीकी से समीक्षा की जा रही है.

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आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत कार्रवाई

फिल्म 'सतलुज' के खिलाफ यह पूरी जांच सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 69A के तहत की जा रही है. आपको बता दें कि आईटी एक्ट की धारा 69A केंद्र सरकार को यह विशेष अधिकार देती है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता, सार्वजनिक व्यवस्था और अन्य निर्धारित आधारों पर किसी भी ऑनलाइन सामग्री (कंटेंट) को ब्लॉक करने या आम जनता के लिए उसकी पहुंच को प्रतिबंधित करने के निर्देश जारी कर सके.

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क्यों लिया गया ओटीटी से हटाने का फैसला?

सूत्रों के अनुसार, फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाने के पीछे सबसे बड़ी और प्रमुख वजह राष्ट्रीय सुरक्षा है. सरकार को यह आशंका थी कि इस फिल्म की सामग्री का इस्तेमाल कमजोर पड़ चुके खालिस्तान समर्थक आंदोलन को दोबारा हवा देने और लोगों को इसकी तरफ आकर्षित करने के लिए किया जा सकता है.

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पंजाब चुनाव को लेकर बढ़ी चिंता

इस मामले में एक और बड़ा एंगल सामने आया है. सूत्रों के मुताबिक, पंजाब में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कुछ खालिस्तान समर्थक तत्वों के फिर से सक्रिय होने की खबरें हैं. आशंका जताई जा रही है कि ये तत्व राज्य का माहौल बिगाड़ने और चुनावी माहौल में फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं. इसी चिंता को देखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर यह कदम उठाया है ताकि किसी भी तरह से देश की शांति और कानून व्यवस्था पर कोई आंच न आए.

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