कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में बताया कि केंद्र सरकार हर साल 22 प्रमुख फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करती है. किसानों को लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है. उन्होंने कहा कि उर्वरकों पर सब्सिडी जारी रखते हुए बीजों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं.

लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस की सांसद प्रतिमा मंडल के सवाल के लिखित जवाब में मंत्री ने कहा- MSP कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर तय किया जाता है. इसमें उत्पादन लागत, मांग-आपूर्ति की स्थिति, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य सहित कई आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है.

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किसान अपनी उपज खुले बाजार में बेचने के लिए स्वतंत्र

सरकार के अनुसार, धान और गेहूं की खरीद भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य एजेंसियों के माध्यम से MSP पर की जाती है. वहीं दालों, तिलहन और कोप्रा की खरीद प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत की जाती है. कपास और जूट की खरीद क्रमशः कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के जरिए की जाती है. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसानों को MSP से अधिक मूल्य मिलता है तो वे अपनी उपज खुले बाजार में बेचने के लिए स्वतंत्र हैं.

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कृषि लागत बढ़ने के मुद्दे पर सरकार ने कहा- यूरिया का अधिकतम खुदरा मूल्य वर्ष 2018 से स्थिर रखा गया है, जबकि डीएपी का मूल्य पिछले तीन वर्षों से नहीं बढ़ाया गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद केंद्र सरकार उर्वरकों पर सब्सिडी देकर किसानों पर लागत का बोझ कम कर रही है.

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बीजों की कीमत को नियंत्रित करने लिए उठाया गया कदम

बीजों की कीमत नियंत्रित रखने के लिए सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता दे रही है. इसके तहत उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का वितरण, राष्ट्रीय बीज भंडार की व्यवस्था और उच्च उत्पादक किस्मों के मिनीकिट मुफ्त में उपलब्ध कराए जा रहे हैं. सार्वजनिक क्षेत्र में बीज उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है.

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कीटनाशकों की कीमतों पर सरकार ने कहा- इनका मूल्य निर्धारण सीधे कानून के दायरे में नहीं आता, लेकिन उपलब्धता बढ़ाने के लिए ‘मी-टू’ श्रेणी में पंजीकरण की व्यवस्था की गई है. कृषि विपणन सुधारों पर सरकार ने बताया कि यह राज्य का विषय है, लेकिन केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर किसानों की बाजार तक पहुंच बढ़ाने, प्रतिस्पर्धी विपणन व्यवस्था विकसित करने और भंडारण तथा विपणन ढांचे को मजबूत करने के प्रयास कर रही है ताकि किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके.

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