उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के कर्मचारियों ने निजीकरण के खिलाफ एक बार फिर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. गोरखपुर में चीफ इंजीनियर ऑफिस के बाहर बड़ी संख्या में बिजली कर्मी, इंजीनियर और कर्मचारी इकट्ठे हुए और सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने साफ कहा कि अगर सरकार ने बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया नहीं रोकी, तो ये आंदोलन पूरे देश में फैलाया जाएगा. ये प्रदर्शन विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले किया गया. समिति के नेताओं ने बताया कि केंद्र सरकार संसद के बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 लाने की तैयारी कर रही है. कर्मचारियों का आरोप है कि ये बिल निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाया जा रहा है और इससे सरकारी बिजली व्यवस्था कमजोर हो जाएगी.
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कर्मचारियों को क्या डर सता रहा है?
बिजली कर्मियों ने कहा कि निजीकरण होने से कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी. संविदा कर्मचारियों की छंटनी बढ़ सकती है और नियमित कर्मचारियों के वेतन, प्रमोशन और पेंशन जैसी सुविधाओं पर भी असर पड़ेगा. प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने सालों तक ईमानदारी से सेवा की है, लेकिन अब उनके भविष्य को असुरक्षित किया जा रहा है. कर्मचारियों ने ये भी कहा कि निजीकरण का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा. इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा.
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सरकार के सामने रखी मांग
बिजली कर्मचारियों का कहना है कि निजी कंपनियों के आने से बिजली के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे गरीब और मिडिल क्लास पर ज्यादा बोझ पड़ेगा. ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति और भी महंगी हो सकती है. संघर्ष समिति ने सरकार से मांग की है कि बिजली विभाग को पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रखा जाए और निजीकरण की प्रक्रिया तुरंत बंद की जाए. कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वो देशभर में हड़ताल और बड़े आंदोलन करेंगे. कर्मचारियों का कहना है कि ये आंदोलन केवल बिजली विभाग तक सीमित नहीं रहेगा. इसमें किसान संगठन, मजदूर यूनियन और आम लोग भी शामिल होंगे. उन्होंने सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की, लेकिन साथ ही ये भी कहा कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष करेंगे.
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