देश में चुनाव आते ही रैलियों, पोस्टरों और प्रचार के साथ सबसे बड़ा मुद्दा पैसे और काले धन के इस्तेमाल का बन जाता है. चुनाव के दौरान वोटरों को लुभाने या नियमों को तोड़ने के लिए भारी मात्रा में नकदी और उपहार जब्त किए जाते हैं. इसी को लेकर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के साथ-साथ 2019 से 2025 के बीच हुए विधानसभा चुनावों के विस्तृत आंकड़े पेश किए हैं. चुनावों में काले धन और गड़बड़ियों के इस्तेमाल को लेकर चुनाव आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट में अहम आंकड़े पेश किए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान देशभर में कुल 3,87,430 FIR दर्ज की गईं. अकेले गुजरात में 52,820 केस दर्ज किए गए.
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लोकसभा चुनावों में गुजरात टॉप पर
आंकड़ों के मुताबिक, 2019 और 2024 के दोनों लोकसभा चुनावों में गुजरात चुनावी गड़बड़ियों के मामलों में शीर्ष पर रहा. 2019 लोकसभा चुनाव में कुल 1,44,030 FIR दर्ज हुईं. इसमें गुजरात 35,144 मामलों के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि उत्तर प्रदेश में 19,209 और महाराष्ट्र में 18,928 केस दर्ज हुए. 2024 लोकसभा चुनाव में कुल 3,87,430 FIR में से अकेले गुजरात में 52,820 केस दर्ज किए गए. इसके बाद महाराष्ट्र में 29,545, पश्चिम बंगाल में 27,461 और यूपी में 23,645 FIR दर्ज हुईं. 2024 के लोकसभा चुनाव के कुल मामलों में से 1,66,044 में आरोप साबित हुए, 76,987 केस बंद किए गए, 24,950 में आरोपी बरी हुए और 1,06,841 मामले अभी भी ट्रायल में लंबित हैं.
विधानसभा चुनावों में तेलंगाना आगे
2019 से 2025 के बीच हुए विधानसभा चुनावों में कुल 2,01,894 मामले दर्ज किए गए. इसमें 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा 33,496 FIR दर्ज हुईं. इसके बाद 2022 के गुजरात चुनाव में 30,253 और 2024 के महाराष्ट्र चुनाव में 26,302 मामले सामने आए.
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सिर्फ FIR दर्ज होना ही काफी नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनावी गड़बड़ियों में सिर्फ FIR दर्ज होना ही काफी नहीं है, बल्कि समय पर जांच पूरी होना और दोषियों पर कार्रवाई होना बेहद जरूरी है. चुनाव के दौरान जब्त की गई नकदी या संपत्ति की कार्रवाई में पूरी पारदर्शिता बरतनी होगी और जब्ती के लिखित कारण 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने होंगे. चुनावी अपराध से जुड़ी FIR की जांच को सामान्य तौर पर एक साल के भीतर पूरा करने की कोशिश की जाए. अगर देरी होती है, तो उसका स्पष्ट कारण रिकॉर्ड में दर्ज करना होगा. सुप्रीम कोर्ट का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और चुनावी मामलों के बेवजह लंबे खिंचने पर रोक लगाना है.
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