चुनाव आयोग ने केरल विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखों का औपचारिक ऐलान कर दिया है. केरल में 9 अप्रैल को मतदान होगा और 4 मई को चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जाएगा. यह चुनाव केरल की राजनीति के लिए निर्णायक साबित होगा, जहां तीन प्रमुख गठबंधनों लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF), यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) और नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा.

केरल विधानसभा में कुल 140 सीटें हैं. इनमें से 139 सामान्य और एक आरक्षित (कोझिकोड दक्षिण) सीट शामिल है. किसी भी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए बहुमत हासिल करने के लिए न्यूनतम 71 सीटों की जरूरत होगी. अगर कोई गठबंधन ठीक 70 सीटों पर सिमट जाता है तो बहुमत नहीं बन पाएगा और समर्थन या गठबंधन की राजनीति शुरू हो जाएगी. केरल में अब तक की परंपरा रही है कि चुनाव एक चरण में ही पूरा होता है, जिससे मतदान प्रतिशत और परिणामों में पारदर्शिता बनी रहती है.

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पिछले वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के नतीजों को देखें तो सत्तारूढ़ LDF ने भारी बहुमत हासिल किया था. CPI(M) के नेतृत्व वाले LDF को 99 सीटें मिलीं, जिसमें CPI(M) अकेले 62 सीटों पर काबिज हुआ. वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF को सिर्फ 41 सीटें प्राप्त हुईं. BJP की अगुवाई वाला NDA पूरी तरह खाली हाथ रहा और उसे शून्य सीटें मिलीं. 2021 में LDF की यह जीत लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी थी, जो केरल में वामपंथी राजनीति की मजबूती को दर्शाती है. UDF हालांकि विपक्ष की भूमिका में मजबूत रहा, लेकिन सीटों के लिहाज से काफी पीछे रहा.

सीईसी ज्ञानेश कुमार ने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन करें, जो घोषणा के साथ ही लागू हो गई है. उन्होंने कहा कि आयोग सभी पक्षों के साथ समन्वय बनाकर काम करेगा और चुनाव को 'उत्सव' की तरह मनाने की कोशिश रहेगी. गौरतलब है कि इन बयानों से आयोग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि 2026 के इन विधानसभा चुनावों को लेकर सुरक्षा और निष्पक्षता पर कोई समझौता नहीं होगा. अब सभी दलों की नजरें अभियान और रणनीतियों पर टिकी हैं.