El Nino 2026 india monsoon impact: अमेरिकी मौसम एजेंसी नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने अपनी ताजा क्लाइमेट बुलेटिन में दुनिया को एक गंभीर चेतावनी जारी की है. प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र का तापमान उम्मीद से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है, जिसके चलते साल 2026 के अंत तक 76 साल बाद अल नीनो के खतरनाक होने की आहट है और इसका मानसून पर असर दिखने लगा है.
NOAA के मुताबिक, अक्टूबर-दिसंबर के दौरान बहुत ही मजबूत अल नीनो की 81 प्रतिशत संभावना है, जो 1950 से अब तक के ऐतिहासिक रिकॉर्ड में सबसे बड़ी अल नीनो घटनाओं में से एक होगी,आसान शब्दों में कहें तो, यह अल नीनो रिकॉर्ड के मुताबिक सामान्य से 7 हफ्ते आगे चल रहा है, जो भारत में जुलाई-अगस्त के मुख्य मानसूनी महीनों में बारिश को 94% से नीचे धकेल देगा, जिससे देश में गंभीर सूखा, रिकॉर्डतोड़ गर्मी और बिजली संकट का खतरा पैदा हो गया है. यह स्थिति अगले साल यानी 2027 के शुरुआती महीनों तक खिंच सकती है, जिससे 2027 इतिहास का सबसे गर्म साल बन सकता है.
भारत के लिए इसका क्या अर्थ है?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे अल नीनो की स्थिति मजबूत होगी, भारत में इसके नेगेटिव असर दिखेंगे. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 9 जुलाई को अपने साप्ताहिक अपडेट में 22 जुलाई तक देश भर में सामान्य से थोड़ी कम वर्षा का पूर्वानुमान लगाया है. तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तरी कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी सामान्य वर्षा का पूर्वानुमान है. मौसम विज्ञानियों का कहना है कि जुलाई में कम वर्षा अल नीनो के प्रभाव का पहला संकेत हो सकता है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने इस जुलाई में 94 प्रतिशत से कम वर्षा का पूर्वानुमान लगाया है.
भारत के एनर्जी ग्रिड पर दोहरा वार
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस अल नीनो का सबसे घातक असर भारत के पावर सेक्टर पर पड़ेगा. बारिश कम होने से हाइड्रोपावर (जलविद्युत) उत्पादन घटेगा, जबकि भीषण गर्मी के कारण एयर कंडीशनिंग की मांग में 10 TWh का अतिरिक्त उछाल आएगा. यह बिजली की कमी भारत में 17 मिलियन टन अतिरिक्त कार्बन उत्सर्जन को जन्म दे सकती है.
खरीफ की फसलों पर संकट
जुलाई का महीना भारतीय खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी दौरान देश में सबसे ज्यादा बुवाई होती है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, सरकार स्थिति पर नजर रख रही है, लेकिन यदि जुलाई का मानसून कोटा 94% से कम रहता है, तो धान, मक्का और सोयाबीन जैसी मुख्य फसलों के उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे बाजार में महंगाई बढ़ सकती है.
‘गॉडज़िला’ अल नीनो की कड़वी यादें
इससे पहले साल 2015-16 में आए ‘गॉडज़िला’ अल नीनो ने भारत को लगातार दो साल (2014 और 2015) सूखा दिया था, जिससे देश के जलाशय सूख गए थे और भूजल का स्तर ऐतिहासिक रूप से नीचे चला गया था. 2026 का यह दौर उसी खौफनाक पैटर्न को दोहराता दिख रहा है.
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