कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक लेख लिखकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से पूछा है कि संसद मार्च में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ अवैध और असंवैधानिक हिंसा को अधिकृत किसने किया? राहुल गांधी के लेख के अनुसार, 20 जुलाई 2026 को निष्पक्ष एजुकेशन सिस्टम और पेपर लीक के लिए जवाबदेही की मांग करने के लिए भारत के नौजवान एकजुट हुए. युवा महिलाएं और पुरुष हर जाति, वर्ग, क्षेत्र और धर्म से आए थे. वे न्याय की मांग करने के लिए पर्याप्त साहसी थे, अपने संवैधानिक अधिकारों को जानने के लिए बुद्धिमान थे.
पूरे देश ने प्रदर्शनकारियों को संघर्ष करते देखा
राहुल गांधी ने अपने लेख में लिखा कि प्रदर्शनकारी छात्र अपनी ही उथल-पुथल पर हंसने के लिए संवेदनशील थे. वे यह विश्वास करने के लिए दृढ़ थे कि वे लड़ सकते हैं और जीत सकते हैं. पूरा देश प्रदर्शनकारियों को देख रहा था, जब वे गा रहे थे, नाच रहे थे, हंस रहे थे, एक-दूसरे का हाथ थामे खड़े थे. उनके प्रतिरोध ने न केवल उनकी अपनी पीढ़ी के दर्द को, बल्कि उन करोड़ों भारतीयों के दर्द को भी आवाज दी, जो पीड़ा झेल रहे हैं, लेकिन डर के मारे चुप करा दिए गए हैं. युवाओं के विरोध प्रदर्शनों ने भारत की शांतिपूर्ण प्रतिरोध की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाया, एक ऐसी परंपरा जिसने देश को स्वतंत्रता दिलाई.
छर्रे लगने से युवाओं की आंखों की रोशनी गई
अपने हक और अधिकारों के लिए विरोध प्रदर्शन संविधान के अनुच्छेद 19 के द्वारा संरक्षित है. फिर भी सरकार ने युवाओं की आवाज को बेरहमी से कुचलने की कोशिश की. उन पर आंसू गैस के गोले दागे गए, कीलों से जड़ी लाठियों से पीटा गया और छर्रे वाली बंदूकों से गोलियां चलाई गईं. मेरी मुलाकात 19 वर्षीय साहिल लोचाब से हुई, जिसके शरीर के ऊपरी हिस्से में सीसे के छर्रे धंसे हुए थे. एक छर्रा उसकी आंख में लगा, जिससे संभवतः उसकी आंखों की रोशनी चली गई. पुलिसकर्मियों ने युवतियों पर लाठियों से बेरहमी से हमला किया, जिससे कई युवतियों के प्राइवेट पार्ट्स पर चोटें आईं. बिहार के सिवान में प्रदर्शनकारियों पर एके-47 समेत कई हथियारों से गोलियां चलाई गईं. इस अवैध और असंवैधानिक हिंसा को किसने अधिकृत किया?
मोदी सरकार को अपने केंद्रीकृत नियंत्रण पर गर्व
राहुल गांधी ने लिखा कि नरेंद्र मोदी सरकार को अपने केंद्रीकृत नियंत्रण पर गर्व है. चाहे मंगल ग्रह का मिशन हो या ओलंपिक पदक, वह बार-बार यही दावा करती है कि इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को जाता है. उनकी मंजूरी के बिना कुछ भी नहीं होता. 20 जुलाई को जो हिंसा हुई, वह दिल्ली में बीचों-बीच संसद से महज 500 मीटर की दूरी पर हुई. दोनों सुरक्षा बलों दिल्ली पुलिस और RAF सीधे गृह मंत्री को रिपोर्ट करते हैं. ऐसे में केवल 2 ही संभावनाएं हैं. पहली यह कि उन्होंने ही छात्रों पर हमले का आदेश दिया था तो इस स्थिति में वे दोषी हैं. दूसरी, उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि ऐसा हो रहा है, जिसका अर्थ है कि वे पूरी तरह से अक्षम हैं.
गृह मंत्री जांच कराने और बयान देने से बच रहे
दोनों ही मामलों में 20 जुलाई का जो कुछ भी हुआ, उसकी जिम्मेदारी गृह मंत्री है और उन्हें इस्तीफा देना होगा. लेकिन मामले में उनकी निष्क्रियता यह साबित करती है कि वे छात्रों पर हुए हमले का समर्थन करते हैं. उन्होंने न तो जांच का आदेश दिया है और न ही कोई बयान जारी किया है. उन्होंने संसद में आने से ही इनकार कर दिया है और विपक्ष के द्वारा प्रतिदिन चर्चा के लिए पेश किए गए प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया गया है. वहीं दूसरी ओर, अपनी छवि बचाने के लिए बेताब प्रधानमंत्री मोदी ने अपने प्रचार तंत्र और गोदी मीडिया को सक्रिय कर दिया है. युवा प्रदर्शनकारियों को डराने के लिए उनके खिलाफ FIR दर्ज की हैं. भारतीय जनता पार्टी के ऑनलाइन ट्रोल युवा महिला प्रदर्शनकारियों और उनके माता-पिता को धमका रहे हैं.
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प्रधानमंत्री कार्रवाई की बजाय वीडियो बना रहे
महिला प्रदर्शनकारियों और उनके माता-पिता को सार्वजनिक माफी मांगने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं एक वीडियो जारी करके भारत के युवाओं को उनके अभिव्यक्ति के वैध अधिकार का प्रयोग करने के लिए माफ कर दिया है. यह कितना हास्यास्पद है कि एक प्रधानमंत्री अपने ही लोगों को तब माफ कर दे, जब वे जवाबदेही की मांग कर रहे हों. PM
मोदी स्पष्ट रूप से जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटे हुए हैं, इसलिए मैं उन्हें चेतावनी देना चाहता हूं कि देशभर के युवा जाग उठे हैं. उनकी छवि पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है और अब उसे सुधारा नहीं जा सकता.
भारत के युवा उन्हें, गृह मंत्री शाह को या किसी भी अधिकारी को उनके कार्यों के परिणामों से बचने नहीं देंगे. हम युवाओं के साथ खड़े हैं. हम इन अपराधों को बिना सजा के नहीं जाने देंगे. जवाबदेही जल्द ही मिलेगी और हम इसे सुनिश्चित करेंगे.