भारतीय निर्वाचन आयोग की SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इंडिया गठबंधन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने के लिए मार्च किया. इस दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और जेडीयू नेता तेजस्वी यादव सहित कई बड़े विपक्षी नेता मार्च में शामिल हुए. सुप्रीम कोर्ट को दी गई याचिका में राहुल गांधी के अलावा 10 अन्य याचिकाकर्ता शामिल हैं. चुनाव आयोग के खिलाफ दी कई याचिका में विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से कई बड़ी मांगें की हैं.
इंडिया गठबंधन ने याचिका में आयोग के फैसलों की प्रक्रिया की न्यायिक जांच कराने, महत्वपूर्ण दस्तावेज सार्वजनिक करने और मतदाता सूची से नाम हटाने के नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है. विपक्ष ने विशेष रूप से 24 जून 2025 को SIR शुरू करने के फैसले से जुड़े दस्तावेजों का ब्योरा मांगा है.
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याचिका में विपक्ष की कौन-कौन सी प्रमुख मांगें?
याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग ने SIR से संबंधित फैसले किस प्रक्रिया के तहत लिए, इसकी जांच जरूरी है. इसके लिए आयोग की पूरी फाइलें, बैठक का एजेंडा, कार्यवाही का विवरण, अधिकारियों की टिप्पणियां और दर्ज आपत्तियों को सामने लाने की मांग की गई है. इसके अलावा ECINET और ERONET प्रणालियों के एक्सेस लॉग भी उपलब्ध कराने को कहा गया है, जिससे मतदाता सूची से संबंधित डिजिटल गतिविधियों की जांच की जा सके.
चुनाव आयोग के फैसलों की जांच की भी मांग
विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से यह जांच करने की अपील की है कि SIR से जुड़े फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों से संबंधित 2023 के कानून और टीएन शेषन बनाम भारत संघ मामले में दिए गए फैसले के अनुरूप लिए गए या नहीं. याचिका में यह भी मांग की गई है कि चुनाव आयोग के SIR से संबंधित प्रत्येक निर्णय को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार लिया जाए और उसका विधिवत रिकॉर्ड तैयार किया जाए. विपक्ष का जोर फैसलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर है.
SIR पर अंतरिम रोक लगाने की मांग
विपक्ष द्वारा ये मांग भी की रखी गई है कि किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले नोटिस और सुनवाई का उचित अवसर दिया जाए. हटाए गए मतदाताओं की बूथवार सूची, हटाने के कारण और जनसांख्यिकीय विवरण प्रकाशित किए जाएं. हटाए गए नामों और मतदाता-सूची डेटाबेस में बदलावों की जांच के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति बनाने और मामले के निपटारे तक जारी SIR पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की गई है.
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