8 बड़े बंकर...बख्तरबंद गाड़ियों की पार्किंग...पैंगोग झील के पास दिखी चीन की चालबाजी, सैटेलाइट तस्वीरों में खुला राज

East Ladakh Pangong Lake: चीनी सेना ने पैंगोग झील के पास भारतीय दावे वाली जमीन पर 8 बड़े और विशालकाय बंकरों का निर्माण किया है। जून 2020 में गलवान में भारतीय सेना के साथ हुई झड़प के बाद से चीन लगातार इस क्षेत्र में निर्माण कार्य कर रहा है।

East Ladakh Pangong Lake China Made 8 big bunkers

सैटेलाइट तस्वीरों में खुला राज (Image Source- Blacksky)

East Ladakh Pangong Lake: चीन ने एक बार फिर पैंगोग झील के पास कई बड़े और विशालकाय बंकरों का निर्माण किया है। सैटेलाइट इमेज के जरिए पता चला है कि चीन की सेना पूर्वी लद्दाख में पैंगोग झील केे आसपास लगातार खुदाई कर रही है। जानकारी के अनुसार चीन हथियार और ईंधन भंडारण के लिए भूमिगत बंकरों के निर्माण में जुटा है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में बख्तरबंद वाहनों को रखने के लिए पक्का निर्माण भी चीन कर रहा है।

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पैंगोग झील के उत्तरी किनारे पर पहाड़ों के बीच बसे सिरजाप में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का बेस झील के आसपास तैनात सैनिकों का मुख्यालय है इसे भारत के द्वारा दावा किए जा रहे इलाके में बनाया गया है। यह वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगभग 5 किमी. की दूरी पर स्थित है। मई 2020 में शुरु हुए विवाद से पहले इस क्षेत्र में चीन ने ऐसा कोई निर्माण नहीं किया था।

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चीनी आर्मी ने बनाए 8 छोटे-बड़े बंकर

अमेरिकी फर्म ब्लैकस्काई द्वारा जारी की गई तस्वीरों के अनुसार 2021-22 के दौरान बनाए गए बेस में भूमिगत बंकर हैं। इन बंकरों का इस्तेमाल हथियारों को रखने और ईंधन या अन्य आपूर्ति को संग्रहीत करने के लिए किया जा सकता है। 30 मई को ली गई तस्वीरों में सामने आया कि इन भूमिगत बंकरों के आठ ढलान वाले एंट्री गेट स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। पांच प्रवेश द्वारों वाला एक और छोटा बंकर बड़े बंकर के पास स्थित है।

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चीन की सेना ने बनाए कई बड़े बंकर

पीएलए द्वारा बनाए गए इन बंकरों में बख्तरबंद वाहनों के लिए पक्के बंकर भी बनाए गए हैं। विशेषज्ञों की मानें तो दुश्मन के हमलों से बचाने के लिए बख्तरबंद गाड़ियों के लिए इन बंकरों का निर्माण किया गया है। ब्लैकस्काई एक विश्लेषक ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि चीनी आर्मी द्वारा विकसित किए इस बैस में कई बड़े बंकरों का निर्माण किया गया है। इन बंकरों में गाड़ियों के भंडारण, टेस्टिंग रेंज, ईंधन और गोला बारूद के भंडारण के लिए इमारतों का निर्माण किया गया है। चीनी आर्मी का यह बेस गलवान घाटी से 120 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में स्थित है। जहां जुन 2020 में झड़प हुई थी। जिसमें 20 भारतीय और 40 चीनी सैनिक मारे गए थे।

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