DRDO Armoured Vehicle: भारतीय सेना अब पहले से कहीं ज्यादा घातक और आधुनिक होने जा रही है. भविष्य के युद्धों की जरूरतों को देखते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक खास बख्तरबंद प्लेटफॉर्म तैयार किया है. इसे विशेष रूप से वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (VRDE) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है. DRDO ने न्यूज़ 24 से जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह वाहन भारतीय सशस्त्र बलों की बदलती परिचालन जरूरतों को पूरा करने में गेम-चेंजर साबित होगा.
इस स्वदेशी आर्मर्ड व्हीकल की सबसे बड़ी खूबी इसकी उन्नत मारक क्षमता और गतिशीलता है. 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत इसमें 30 मिमी का क्रूलेस बुर्ज लगाया गया है, जिसे 7.62 मिमी पीकेटी गन के साथ जोड़ा गया है. इतना ही नहीं, यह वाहन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल दागने में भी पूरी तरह सक्षम है, जो इसे दुश्मन के टैंकों के लिए काल बनाता है.

रेगिस्तान हो या पहाड़, हर जगह भरेगा रफ्तार

शक्तिशाली इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन से लैस यह व्हीकल किसी भी चुनौतीपूर्ण रास्ते पर चलने के लिए बना है. चाहे पथरीले रास्ते हों, रेगिस्तान की रेत, जलभराव वाले इलाके या फिर ऊंची पहाड़ियां—यह हर जगह तेज गति से दुश्मन को मात देने की ताकत रखता है. साथ ही, पानी में चलने के लिए इसे हाइड्रो जेट तकनीक से लैस किया गया है.

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70% स्वदेशी सामान का हुआ है इस्तेमाल

इस प्रोजेक्ट की खास बात इसका स्वदेशी होना है. वर्तमान में इसमें 70 फीसदी कल-पुर्जे भारतीय हैं. डीआरडीओ का लक्ष्य जल्द ही इसे 100 प्रतिशत आत्मनिर्भर बनाना है. इसके निर्माण में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और भारत फोर्ज लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियों के साथ कई MSME इकाइयों ने भी कंधा से कंधा मिलाकर सहयोग दिया है.

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सेना के लिए क्यों है खास?

मेजर जनरल एसके सिंह के अनुसार, "यह आर्मर्ड व्हीकल 'मेक इन इंडिया' के तहत डिफेंस सेक्टर में स्वदेशीकरण को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा. यह न केवल हमारी सेना को सशक्त बनाएगा, बल्कि युद्ध के मैदान में सैनिकों को बैलिस्टिक और विस्फोटक हमलों से सुरक्षा भी प्रदान करेगा." सैन्य जरूरतों के हिसाब से इस वाहन को अलग-अलग कॉन्फिगरेशन में ढाला जा सकता है, जो इसे बेहद बहुमुखी बनाता है.

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