CJP प्रोटेस्ट से पहले चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, वोटर लिस्ट से नाम डिलीट का प्रॉसेस किया सख्त

Voter Deletion Form: पिछले कुछ वक्त से चुनाव आयोग ‘फॉर्म-7’ को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी हंगामा मचता आ रहा है, क्योंकि कथित तौर पर एक शख्स काफी ज्यादा वोटर्स के नाम कटवाने के लिए फॉर्म भरते हुए पकड़ा गया था, लेकिन अब इलेक्शन कमीशन ने नए नियम काफी सख्त कर दिए हैं.

Form 7 Gyanesh @ECISVEEP

फॉर्म 7 भरने का नियम सख्त हुआ (Photo-X/@ECISVEEP)

ECI Limits Form-7 Voter Deletion Requests: दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रोटेस्ट से पहले ने वोटर लिस्ट में एंट्री को चुनौती देने या नाम हटवाने के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘फॉर्म-7’ एप्लिकेशन के लिए कड़े नियम लागू किए हैं. नए निर्देशों में वोटर्स की तरफ ले जमा किए जाने वाले आवेदनों की लिमिट तय की गई है, ताकि बिना ठोस आधार के बार-बार आपत्ति दर्ज कराने से रोका जा सके. ये निर्देश बीते शुक्रवार, 9 अक्टूबर को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर्स (CEOs) को जारी किए गए.

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एक वोटर कितने ‘फॉर्म-7’ भर सकता है?

रिवाइज्ड इंस्ट्रक्शन के तहत, इंडिविजुअल वोटर ‘दावे और आपत्तियों’ की पूरी अवधि के दौरान अधिकतम 10 ‘फॉर्म-7’ आवेदन जमा कर सकते हैं. वोटर लिस्ट को लगातार अपडेट करने के प्रॉसेस के दौरान, ये लिमिट हर महीने प्रति शख्स 5 आवेदन है. ये लिमिटेशन ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों तरह से एप्लिकेशन जमा करने पर लागू होते हैं. चुनाव आयोग ने कहा कि बार-बार आपत्ति करने से असली वोटरों को परेशानी होती है और चुनाव अधिकारियों का काम भी बढ़ जाता है. ‘निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960’ के तहत, सिर्फ संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में रजिस्टर्ड व्यक्ति ही ‘फॉर्म-7’ के तहत आपत्ति दर्ज करा सकता है. हर आवेदन की जांच निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) की तरफ से की जानी चाहिए.

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दस्तखत और वेरिफिकेशन के नियम

एप्लिकेंट को पूरी जानकारी देनी होगी और अपने असली दस्तखत करने होंगे. साइन वाली मुहरों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है. चुनाव अधिकारियों को वोटर लिस्ट से आवेदकों की जानकारी को वेरिफाई भी करना होगा. जो आवेदन तय शर्तों को पूरा नहीं करते या तय समय के बाद जमा किए जाते हैं, उन्हें 1960 के नियमों के नियम 17 के तहत खारिज कर दिया जाना चाहिए.

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नाम हटाने से पहले सुनवाई

नियम 19 और 20 के तहत, ERO को आपत्ति करने वाले को नोटिफाई करना होगा, निजी सुनवाई करनी होगी और हर एप्लिकेशन के लिए अलग बयान दर्ज करना होगा. अगर आपत्ति सही लगती है, तो जिस वोटर का नाम चुनौती के दायरे में है, उसे भी आखिरी फैसला लेने से पहले अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए. ECI ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अगर शिकायतों में जानबूझकर गलत बयान या डिक्लेरेशन पाया जाता हैं, तो ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950’ की धारा 31 के तहत कार्रवाई शुरू की जाए.

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्देश

अंडर सेक्रेटरी संदीप कुमार ने निर्देश जारी करते हुए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव अधिकारियों से कहा कि वे नए नियमों को ERO, असिस्टेंट ERO और फील्ड स्टाफ के बीच तुरंत लागू करने के लिए सर्कुलेट करें. अधिकारियों से इन बदलावों का प्रचार-प्रसार करने के लिए भी कहा गया है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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