तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म था, लेकिन अब सारी तस्वीरों पर से धूल हट गई है. सत्तारूढ़ DMK और कांग्रेस के बीच लंबे समय से चल रही सीट बंटवारे की कशमकश आज खत्म हो गई. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और DMK प्रमुख एमके स्टालिन से फोन पर लंबी बातचीत की, जिसके बाद दोनों दलों ने गठबंधन और सीट शेयरिंग पर पूरी तरह सहमति जता दी. बुधवार को चेन्नई में हुई एक हाई-प्रोफाइल मीटिंग के बाद दोनों दलों के शीर्ष नेताओं ने एकजुटता का संदेश दिया.
सीटों का फाइनल फॉर्मूला क्या है?
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु विधानसभा की कुल 234 सीटों में से कांग्रेस को 28 विधानसभा सीटें मिलेंगी. इसके अलावा कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट भी देने का वादा किया गया है. इससे पहले कांग्रेस ने 35 सीटों की मांग की थी, जबकि DMK शुरुआत में 25 सीटों से ज्यादा देने को तैयार नहीं था. कई दौर की बातचीत और खींचतान के बाद यह समझौता हुआ. पिछले विधानसभा चुनाव में भी DMK ने कांग्रेस को 25 सीटें दी थीं, जिसमें से कांग्रेस के 18 उम्मीदवार जीते थे. इस बार कांग्रेस ने ज्यादा सीटों की मांग की थी, लेकिन आखिरकार 28 सीटें + राज्यसभा सीट पर सहमति बनी.
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कैसे सुलझा विवाद?
होली के मौके पर खड़गे ने स्टालिन से फोन पर बात की और मुद्दों को सुलझाया. इससे पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने भी स्टालिन और DMK नेताओं से मुलाकात कर प्रयास किए थे, लेकिन मामला फंसा हुआ था. कांग्रेस सीटों की मांग पर अड़ी रही, जबकि DMK ने नए गठबंधन साथियों को ध्यान में रखते हुए सीमित ऑफर दिया था. आखिरकार खड़गे की व्यक्तिगत हस्तक्षेप से यह डील फाइनल हुई.
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