बीते कुछ दिनों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की तेल खरीद नीति को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा था कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है. ट्रंप ने यह भी कहा था कि भारत अब अमेरिका या फिर वेनेजुएला से तेल खरीदने पर सहमत है, लेकिन क्या सच में ऐसा होगा? इस मामले को लेकर भारत सरकार का भी जवाब अब सामने आ गया है.
वहीं, अमेरिका के बार-बार कहने के बावजूद भारत रूस से तेल खरीदेगा या नहीं इस पर भी विदेश मंत्रालय की टिप्पणी सामने आई है. विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि ‘देश की ऊर्जा आपूर्ति के मामले में 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.’ विभिन्न मंचों पर दिए गए बयानों में सरकार ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक बाजार की बदलती परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों का diversification इस लक्ष्य को हासिल करने की रणनीति का हिस्सा है.
उन्होंने आगे कहा, भारत सरकार के सभी कदम इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर उठाए जाते हैं और भविष्य में भी इसी नीति का पालन किया जाएगा. यह बयान तब आया है जब अमेरिका बार-बार कह रहा है कि भारत ने रूस से तेल नहीं खरीदने का वादा किया है.
भारत वेनेजुएला से तेल खरीदता रहेगा- MEA
वहीं, MEA प्रवक्ता ने कहा कि ‘भारत वेनेजुएला से तेल लेता रहा है और आगे भी वेनेजुएला से फायदेमंद सौदे करेगा.’ बता दें कि साल 2019-20 तक वेनेजुएला भारत के प्रमुख कच्चे तेल स्रोतों में शुमार था लेकिन प्रतिबंधों के कारण आयात बंद हो गया.
भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां 2008 से वेनेजुएला की राष्ट्रीय तेल कंपनी पेट्रोलियस डी वेनेजुएला (PDVSA) के साथ साझेदारी कर रही हैं और वहां अपनी उपस्थिति बनाए हुए हैं. भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति के अनुरूप, देश वेनेजुएला सहित किसी भी नए कच्चे तेल आपूर्ति विकल्पों के साथ साझेदारी और व्यावसायिक लाभ के लिए हमेशा तैयार है.
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर क्या बोले MEA?
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और नई टैरिफ संरचना को लेकर भी विदेश मंत्रालय का बयान सामने आया है. प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ट्रंप की बातचीत और राष्ट्रपति ट्रंप के ट्वीट के बाद प्रधानमंत्री ने खुद बताया कि ‘Make In India’ उत्पाद अब अमेरिका को 18% की कम टैरिफ दर पर निर्यात किए जा सकेंगे.
विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि ये व्यापार समझौता भारत के निर्यात, रोजगार सृजन और विकास को बढ़ावा देगा और समृद्धि लाएगा. अमेरिकी पक्ष ने भी स्पष्ट किया है कि टैरिफ की अंतिम दर 18 प्रतिशत ही होगी.
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