देशभर में NEET-UG परीक्षा में हुई धांधली और छात्रों के लगातार उग्र प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. परीक्षा में आई गड़बड़ियों को लेकर सरकार लगातार विपक्ष और छात्रों के निशाने पर थी, जिसके बाद यह बड़ा फैसला देखने को मिला है. फिलहाल राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से नए शिक्षा मंत्री या प्रभार को लेकर कोई अंतिम औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में नए चेहरे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अचानक दिल्ली तलब किया है. अमित शाह का संदेश मिलते ही देवेंद्र फडणवीस नागपुर से तुरंत दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं.
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अचानक हुए इस घटनाक्रम से दिल्ली और महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मंत्रालय के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार के पास मुख्य रूप से तीन विकल्प हैं:
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राज्य मंत्रियों को तत्काल प्रभार
वर्तमान में शिक्षा मंत्रालय में संभाल रहे राज्य मंत्रियों को अस्थायी या पूर्ण प्रभार सौंपा जा सकता है. इनमें आरएलडी प्रमुख और वर्तमान शिक्षा राज्य मंत्री व कौशल विकास मंत्री जयंत चौधरी और पश्चिम बंगाल बीजेपी के वरिष्ठ नेता व शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार के नाम सबसे आगे चल रहे हैं.
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वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री को अतिरिक्त प्रभार
जब तक औपचारिक रूप से किसी नए नाम का चयन नहीं हो जाता, तब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कैबिनेट के किसी वरिष्ठ और अनुभवी सहयोगी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दे सकते हैं.
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मंत्रिमंडल फेरबदल या नया चेहरा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और आगामी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को पारदर्शी तरीके से आयोजित कराने की बड़ी चुनौती को देखते हुए, सरकार किसी सख्त और मजबूत प्रशासनिक छवि वाले वरिष्ठ नेता को यह जिम्मेदारी दे सकती है.
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