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Dhai Aakhar Sahitya Utsav LIVE: हिंदी भाषा का अपना कल्चर है और अपनी संस्कृति है
Dhai Aakhar Sahitya Utsav LIVE: उन्होंने कहा, जिस भाषा में सोचा जाता है. ये कहना कि विचार मुझे समझ आ गया काफी नहीं है. हिंदी भाषा में रीढ़ है. हिंदी भाषा का अपना कल्चर है और अपनी संस्कृति है.
Dhai Aakhar Sahitya Utsav LIVE: हमारे यहां मौन को भी भाषा कहा गया है- प्रसून जोशी
Dhai Aakhar Sahitya Utsav LIVE: उन्होंने बताया कि 'हिंदी मेरी दूसरी भाषा है. लेकिन मुझे लगता है कि भारत में जो भाषाएं हैं उनका जो उत्स है, हम कहते हैं जिस भाषा में मैं आपसे बोल रहा हूं उसे वैखरी, और वैखरी से पहले मध्यमा होती है (मन में), उससे पहले पश्यंती होती है और उससे पहले परा होती है. तो एक पूरी सीरीज है. हमारे यहां भाषा ने ऐसे ही जन्म नहीं लिया. हर एक शब्द का कहीं गहरा अंतर होता है. उसका एक आध्यात्मिक स्वरूप है. हमारे यहां मौन को भी भाषा कहा गया है.'
Dhai Aakhar Sahitya Utsav LIVE: ढाई आखर साहित्योत्सव में शामिल हुए प्रसून जोशी
Dhai Aakhar Sahitya Utsav LIVE: ढाई आखर साहित्योत्सव में प्रसून जोशी शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने कहा, मैं यहां आने के लिए अपने एक प्रोग्राम को स्थगित करके आया हूं. हिंदी से प्रेम है इसलिए ढाई आखर का आयोजन किया गया है.
Dhai Aakhar Sahitya Utsav LIVE: News24 पर साहित्य और सिनेमा के बड़े दिग्गज हुए शामिल
Dhai Aakhar Sahitya Utsav LIVE: News24 पर साहित्य और सिनेमा के बड़े दिग्गज हुए शामिल.
Dhai Aakhar Sahitya Utsav LIVE: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के हिंदी भवन में आज से से 29 मार्च तक ‘ढाई आखर’ साहित्योत्सव कार्यक्रम का आयोजन शुरू हो गया है. तीन दिवसीय इस भव्य आयोजन में हिंदी भाषा, साहित्य, कला, संगीत और रंगमंच के क्षेत्र की प्रमुख हस्तियां एकजुट होंगी. संवाद और विचार-विमर्श के माध्यम से यह उत्सव हिंदी की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास करेगा. ‘ढाई आखर’ साहित्योत्सव का मुख्य मीडिया पार्टनर News24 है, जहां आपको आयोजन से जुड़ी सभी खबरें मुहैया कराई जाएंगी.
साहित्य, कला और विचारों का संगम
कार्यक्रम के संयोजक एवं कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज के हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. रूपेश शुक्ला ने बताया कि यह कार्यक्रम हिंदी भवन सहित विभिन्न संस्थानों के संयुक्त आयोजन में हो रहा है. साहित्योत्सव का उद्देश्य स्पष्ट है कि हिंदी साहित्य की परंपरा को भविष्य से जोड़ना और वर्तमान दिशा-प्रमिशा पर विचार-मंथन करना. देश भर से साहित्यकार, कवि, लेखक, पत्रकार, कलाकार और रंगकर्मी इसमें शिरकत करेंगे. यह मंच न केवल अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि हिंदी साहित्य के भविष्य पर गंभीर बहस का केंद्र भी बनेगा.
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