18वें ब्रिक्स समिट के दौरान दिल्ली पुलिस का स्नाइपर दीपक बांगर VVIP पर ड्यूटी पर तैनात था, लेकिन ड्यूटी के दौरान उसने एक बहुत बड़ी गलती कर दी. उसने स्नाइपर राइफल से निशाना साधते हुए रील बनाकर इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर दी. यह वीडियो वायरल होता हुआ उच्च अधिकारियों तक पहुंचा और दिल्ली पुलिस की नॉर्थवेस्ट जिले की फॉरेनर्स सेल में तैनात कांस्टेबल दीपक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. सिक्योरिटी ड्यूटी से हटाकर होमटाउन भेज दिया गया ओर उसके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं. जांच करने पर उसके इंस्टाग्राम अकाउंट पर कई वीडियो मिले, जिसमें वह कहीं यूनिफॉर्म में तो कहीं सादे कपड़ों में सर्विस पिस्टल के साथ नजर आया.

सोशल मीडिया के लिए नियमों को लेकर शुरू हुई चर्चा

घटनाक्रम ने सेना-पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए सोशल मीडिया यूज को लेकर सवाल उठाए और चर्चा शुरू हुई कि क्या पुलिसकर्मी, सैनिक, सुरक्षा बलों के जवान, स्नाइपर्स, कमांडो आदि के लिए सोशल मीडिया को लेकर क्या नियम हैं? क्या ये लोग ड्यूटी के दौरान यूनिफॉर्म और अपने सर्विस वेपन के साथ रील्स बना सकते हैं? रील्स को सोशल मीडिया पर अपलोड कर सकते हैं? क्या वे यूनिफॉर्म में फोटो या वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर सकते हैं? अगर नहीं तो नियमों-आदेशों का उल्लंघन करने पर उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है? क्योंकि दीपक बांगर को सस्पेंड किया गया है तो आइए इस बारे में विस्तार से बात करते हैं…

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नियमों-आदेशों का उल्लंघन गंभीर कदाचार माना जाएगा

बता दें कि भारतीय पुलिस, सेना के तीनों अंगों और सुरक्षा बलों के जवाब, स्नाइपर्स और कमांडो ड्यूटी के दौरान यूनिफॉर्म में हथियारों के साथ रील नहीं बना सकते है और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड भी नहीं कर सकते. अगर वे ऐसा करते हैं तो वह सिक्योरिटी प्रोटोकॉल और अनुशासन के खिलाफ है. पुलिस और सैन्य विभाग की और से नियम बनाए गए हैं, जिनके उल्लंघन को 'गंभीर कदाचार' मानकार कार्रवाई की जाती है, जिसके तहत सस्पेंड किया जा सकता है. कोर्ट मार्शल हो सकता है या विभागीय जांच शुरू हो सकती है. इसके लिए कदाचार का दोष सिद्ध होने पर नौकरी से बर्खास्त किया जा सकता है और सुरक्षा अधिनियमों के तहत जेल की सजा भी हो सकती है.

सैनिकों-कमांडो के सोशल मीडिया यूसेज से क्या खतरे?

पुलिसकर्मी, सैनिक, सुरक्षा बलों के जवान, स्नाइपर्स, कमांडो आदि संवदेनशील इलाकों में ड्यूटी के समय वीडियो या रील नहीं बन सकते. VVIP सिक्योरिटी, कॉन्फ्रेंस या ऑपरेशनल इलाकों में तैनाती के दौरान यूनिफॉर्म में हथियारों का प्रदर्शन करते हुए रील बनाना प्रतिबंधित है. क्योंकि ऐसा करने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है. संवेदनशील रणनीतिक जगहों, सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और उनके हथियारों की जानकारी लीक हो सकती है. वहीं डेरा चोरी होने से लोकेशन ट्रेस होने का खतरा है. जिससे उस जगह या शख्स का खतरा हो सकता है, जिसकी सुरक्षा में वह तैनात है. वहीं सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए सैनिकों-जवानों के हनीट्रैप में फंसने का खतरा भी होता है.

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सैनिकों-कमांडों के लिए सोशल मीडिया को लेकर नियम

भारतीय सेना ने दिसंबर 2025 में अपने जवानों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर कुछ नियम और आदेश जारी किए थे. जिनके अनुसार, सेना के जवान और अधिकारियों की सोशल मीडिया पर 'निष्क्रिय भागीदारी' यानी पैसिव पार्टिसिपेशन रहेगा. इसका मतलब यह है कि जवानों और अधिकारियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे इंस्टाग्राम, यूट्यूब, फेसबुक आदि का इस्तेमाल केवल रील्स देखने के लिए, जानकारी हासिल करने के लिए और सोशल मीडिया ट्रेड समझने के लिए कर सकते हैं.

पोस्ट, फोटो, वीडियो, रील को लाइक, कमेंट, शेयर करने या अपने सोशल अकाउंट पर यूजर जनरेटेड कंटेंट अपलोड करने की परमिशन नहीं होगी. मैसेजिंग ऐप्स जैसे व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, स्काइप आदि पर दोस्तों या परिजनों के साथ नॉर्मल जानकारी का आदान-प्रदान कर सकते हैं. सोशल मीडिया प्रोफाइल पर या सोशल मीडिया पोस्ट में अपनी रैंक, यूनिट, कोर, सर्विस नंबर या सेना से जुड़ी कोई जानकारी नहीं बताएंगे. न ही कोई सीक्रेट सोशल मीडिया अकाउंट हैंडल कर सकते हैं.

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पुलिसकर्मियों के लिए सोशल मीडिया को लेकर नियम

दिल्ली पुलिस समेत कई राज्यों की पुलिस ने अपने जवानों और अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइंस जारी की हुई हैं. जिनके अनुसार, जवान और अधिकारी यूनिफार्म पहनकर कोई रील, डांस वीडियो या एंटरटेनमेंट से जुड़ा कोई कंटेंट क्रिएट नहीं कर सकें, इसे वर्दी का दुरुपयोग माना जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

सोशल मीडिया रील्स या वीडियो में अपनी सरकारी गाड़ी, हथियारों, बैरिकेड या पुलिस स्टेशन आदि का इस्तेमाल नहीं करेंगे. पुलिस जांच, कोर्ट ट्रायल या किसी की गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारियों, फोटो, वीडियो बनकर शेयर नहीं करेंगे. पुलिस ट्रेनिंग, स्टिंग ऑपरेशन या इंटरनल एक्टिविटी की फोटो या वीडियो नहीं बनाएंगे और न ही उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट या शेयर करेंगे. वहीं जॉइनिंग करते समय सोशल मीडिया अकाउंट की लिखित जानकारी भी देनी होगी.

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दूसरे देशों की सेना के लिए सोशल मीडिया के नियम क्या?

बता दें कि भारत के अलावा कई देशों ने अपनी सेना के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइंस जारी की हुई हैं. जैसे साल 2019 में रूस की सरकार ने सैन्य जवानों और अधिकारियों के लिए स्मार्टफोन यूज करने पर प्रतिबंध लगाया था. ड्यूटी के दौरान सैनिकों ऐसा फोन इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसमें तस्वीरें खींचने या वीडियो रिकॉर्ड करने की सुविधा नहीं होगी और इंटरनेट का इस्तेमाल भी नहीं होगा. बल्कि सिर्फ परिजनों को कॉल कर सकेंगे.

अमेरिका ने भी अपने सैनिकों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन जारी की हुई है. अमेरिका के सैनिकों को चाइनीज ऐप टिक-टॉक का इस्तेमाल करने की परमिशन भी नहीं है और समय के साथ-साथ भारत भी प्रतिबंधों की सूची में शामिल हो रहा है.

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