दिल्ली की राजनीति से जुड़े चर्चित शराब नीति मामले में शुक्रवार को बड़ा मोड़ आया. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेता अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत सभी आरोपियों को बड़ी राहत दी है. अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी आरोपों को साबित करने में असफल रही, इसलिए सभी आरोपियों को बरी किया जाता है. फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ये सच्चाई और ईमानदारी की जीत है. उन्होंने मोदी सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर हिम्मत है तो बीजेपी दोबारा चुनाव करवाए, उन्हें 10 से ज्यादा सीटें नहीं मिलेंगी.

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'मुझे और मेरी पार्टी को बदनाम किया'

केजरीवाल ने कहा कि लंबे समय तक उन्हें और उनकी पार्टी को बदनाम किया गया. केजरीवाल ने आरोप लगाया कि ये पूरा मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा था, ताकि आम आदमी पार्टी को कमजोर किया जा सके. मनीष सिसोदिया ने भी अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा कानून और संविधान पर भरोसा रखा. उन्होंने कहा कि ये फैसला उन सभी लोगों के लिए जवाब है, जिन्होंने बिना सबूत आरोप लगाए. कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि सबूत मजबूत नहीं हैं और केस में साजिश या भ्रष्टाचार से जुड़ा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया. अदालत के मुताबिक, चार्जशीट में लगाए गए आरोप केवल आशंकाओं पर आधारित थे, जिन्हें कानूनी रूप से साबित नहीं किया जा सका.

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कोर्ट के फैसले को CBI ने चुनौती दी

आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस फैसले को लोकतंत्र की जीत बताया. पार्टी कार्यालय में समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की. हालांकि, मामले में जांच कर रही एजेंसी सीबीआई ने कोर्ट के फैसले से असहमति जताई है. CBI ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है. एजेंसी के मुताबिक, जांच में कई अहम बिंदुओं को सही तरीके से नहीं देखा गया. अब सभी की नजरें हाईकोर्ट पर टिकी हैं, जहां ये मामला अगली सुनवाई के लिए जाएगा. फिलहाल, इस फैसले ने दिल्ली की राजनीति में हलचल तेज कर दी है और आने वाले दिनों में इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है.

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