दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को सौरभ दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर अहम सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान अदालत के कड़े तेवर और सख्त टिप्पणियों के बाद सीजेपी नेताओं को आखिरकार अपनी याचिका वापस लेनी पड़ी है. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका पर गहरी नाराजगी जताई और याचिकाकर्ताओं को जमकर फटकार लगाई. कोर्ट के इस रुख को देखते हुए नेताओं ने बिना किसी और बहस के याचिका को वापस लेना ही बेहतर समझा.
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका के आधार और उसके तरीके पर गंभीर सवाल खड़े किए. कोर्ट ने नसीहत देते हुए साफ कहा कि कानूनी प्रक्रियाओं और अदालती मंच का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाना चाहिए. अदालत के कड़े रुख और तीखी टिप्पणियों के बाद याचिकाकर्ता नेताओं की ओर से मामले को आगे बढ़ाने के बजाय तुरंत वापस लेने की अर्जी दी गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया.
इससे पहले सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से सीधा सवाल किया कि वैकल्पिक कानूनी उपाय मौजूद होने के बावजूद सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाया गया. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, “व्यक्ति की स्वतंत्रता सर्वोपरि है, लेकिन जब कानून में पहले से ही अन्य कानूनी रास्ते उपलब्ध हैं, तो उनका इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा? आप दो घंटे के भीतर अदालत पहुंच गए.” अदालत ने यह भी कहा कि अगर वे चाहें तो मामले को छुट्टियों के बाद के लिए टाला जा सकता है या वे उचित आवेदन दाखिल कर सकते हैं.
कोर्ट ने रेखांकित किया कि शांति भंग की आशंका और मजिस्ट्रेट के अधिकारों से जुड़ी बहस को उचित कानूनी मंच पर उठाया जाना चाहिए, जबकि वर्तमान मामला केवल बॉन्ड भरने की अनिवार्यता तक सीमित है.र मजिस्ट्रेट के अधिकारों से जुड़ी बहस को उचित कानूनी मंच पर उठाया जाना चाहिए, जबकि वर्तमान मामला केवल बॉन्ड भरने की अनिवार्यता तक सीमित है.
वकील का आरोप: मनमाने तरीके से खारिज हुए जमानतदार
सौरभ दास और आशुतोष रांका की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिक चिमनी ने अदालत में दलील दी कि प्रिवेंटिव कस्टडी का इस्तेमाल मनमाने ढंग से नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा, “पिछली बार जमा किए गए बॉन्ड में दो नए ज़मानतदार पेश किए गए थे. स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने उनकी जांच तक नहीं की और मनमाने तरीके से उन्हें खारिज कर दिया.” चिमनी ने आशंका जताई कि याचिका वापस लेने पर ज़मानतदारों को फिर से खारिज कर दिया जाएगा.
दिल्ली पुलिस का पक्ष और आगे की कार्रवाई
इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा और केंद्र सरकार के स्थायी वकील (CGSC) आशीष दीक्षित अदालत में पेश हुए. दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई को 5 मिनट के लिए स्थगित कर दिया और अधिवक्ता अभिक चिमनी को अपील दाखिल करने को लेकर अपने मुवक्किल से निर्देश लेकर लौटने का निर्देश दिया.