लद्दाख की तेज हवा, हाथ कपा देने वाली कड़ाके की ठंड और 17,618 फीट की ऊंचाई के बीच इंडियन आर्मी की कर्नल शिवानी सांगवान ने सेना के लिए एक नई ऊंचाई जोड़ने का काम किया है. वह इसलिए भी कि जिस ऊंचाई पर ऑक्सीजन बेहद कम हो जाती है, सांस लेना मुश्किल हो जाता है, वहां कर्नल शिवानी ने 122 किमी की दौड़ पूरी की. जी हां, 122 किलोमीटर कर्नल शिवानी सांगवान ने एक सपने को पोडियम फिनिश में बदल दिया. सेना मेडिकल कोर अधिकारी और दो बच्चों की मां ने लद्दाख में कठिन सिल्क रूट अल्ट्रा 2026 को पूरा किया.
महिलाओं का काम सिर्फ घर संभालना नहीं है
समुद्र तल से हजारों फीट ऊपर बढ़ती ऊंचाई के साथ हवा में ऑक्सीजन की उपलब्धता घटती जाती है. ऐसे में शरीर को सामान्य परिस्थितियों की तुलना में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. ठंड और कठिन पहाड़ी रास्तों के बीच लंबी दूरी तय करना शारीरिक क्षमता से अधिक मानसिक मजबूती की परीक्षा बन जाती है, कुछ जीतों को पदकों में मापा जाता है. दूसरों को किलोमीटर, बलिदानों और आत्म-संदेह के क्षणों में मापा जाता है, जिन पर व्यक्ति रास्ते में काबू पाता है. आर्मी मेडिकल कोर की कर्नल शिवानी सांगवान के लिए, निर्धारित कट-ऑफ के भीतर 122 किलोमीटर के कठिन कोर्स को जीतने के बाद, लद्दाख में सिल्क रूट अल्ट्रा 2026 उन महिलाओ के लिए एक प्रेरणा बनकर आई है जो सोचती है कि मैं महिला हु मेरा काम सिर्फ घर संभालने का है.
---विज्ञापन---
सपने और हौंसले बुलंद हो तो कुछ भी कर सकते हैं
दो बच्चों की मां और आर्मी मेडिकल कोर अधिकारी कर्नल शिवानी सांगवान ने अपने पेशे और परिवार की कठिन जिम्मेदारियों को निभाते हुए इस जीत को हासिल किया है. दो बच्चों की मां के रूप में, कर्नल शिवानी की यात्रा उन अनगिनत महिलाओं को एक शक्तिशाली संदेश भी देती है जो पेशेवर और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अक्सर अपने सपनों को एक तरफ रख देती हैं. कर्नल शिवानी सांगवान ने दिखाया है कि जब कर्तव्य और सपने एक साथ चलते हैं, तो सबसे ऊंचे पहाड़ भी मील का पत्थर बन सकते हैं.
---विज्ञापन---