CJI Surya Kant On Economic Offences: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए छिपाए गए पैसे को वापस लाने में अधिकारियों की लिमिटेड सक्सेस पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल हर 100 रुपये में से एजेंसियां ​​सिर्फ 1 रुपया ही वापस ला पाती हैं. उन्होंने इस कम रिकवरी रेट के लिए वित्तीय अपराध करने वालों के नए और जटिल तरीकों और इंटरनेशनल कोऑपरेशन में कमियों को जिम्मेदार ठहराया.

कैम्ब्रिज में बोले सीजेआई

कैम्ब्रिज में आर्थिक अपराध पर 43वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, CJI सूर्यकांत ने कहा कि दुनिया भर में अवैध संपत्ति का दायरा बहुत बड़ा है. उन्होंने बताया कि एक साल में दुनिया भर में जितनी मनी लॉन्ड्रिंग होती है, उससे सैद्धांतिक रूप से दुनिया के हर शख्स के लिए एक नॉर्मल लैपटॉप खरीदा जा सकता है.

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'अंतरराष्ट्रीय समझौतों से ज्यादा तेज आर्थिक अपराध'

सीजेआई ने बताया कि आर्थिक अपराधी देशों के बीच समझौतों पर बातचीत करने, उन्हें मंजूरी देने और लागू करने की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से सीमाओं के पार पैसा भेज सकते हैं. उन्होंने कहा कि इसी वजह से अवैध संपत्ति का पता लगाने, उसे जब्त करने और वापस लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय तालमेल जरूरी है.

कौटिल्य के अर्थशास्त्र का जिक्र करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने याद दिलाया कि उसमें कहा गया था कि राज्य का राजस्व संभालने वाले अधिकारियों से हमेशा ये उम्मीद नहीं की जा सकती कि वो अपने लिए हिस्सा नहीं लेंगे. उन्होंने बताया कि प्राचीन भारत में ऑडिट, सत्यापन और अवैध रूप से हासिल की गई संपत्ति को जब्त करने जैसे तरीकों से ऐसे जोखिमों से निपटा जाता था.

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सीजेआई ने कहा कि भारत ने आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए कई कानून बनाए हैं, और अदालतों ने भी कानून लागू करने और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है. हालांकि, कई देशों के साथ प्रत्यर्पण और आपसी कानूनी सहायता समझौतों के बावजूद, विदेशों में मौजूद संपत्ति की रिकवरी निराशाजनक रही है.

मिलकर कार्रवाई करने की जरूरत

उन्होंने जोर दिया कि अनएक्सप्लेंड वेल्थ ऑर्डर्स, बिना कंविक्शन के संपत्ति जब्त करना, बेनिफिशियल ओनरशिप रिकॉर्ड और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस सिस्टम जैसे साधन पहले से ही मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि असली चुनौती ये सुनिश्चित करना है कि देश इन तरीकों का इस्तेमाल मिलकर और तेजी से करें. गौरतलब है कि भारत ने भगोड़े कारोबारियों विजय माल्या और नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की कोशिश की है, लेकिन इन कोशिशों का नतीजा अभी तक उनके इंडिया में एक्सट्रेडिशन के तौर पर नहीं निकला है.

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