राजस्थान हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों पर सीजेआई सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाया है. जर्मनी और यूके के चार दिन के दौरे पर गए सीजेआई सूर्यकांत ने बयान जारी कर कहा कि किसी मौजूदा जज के खिलाफ आरोपों का निपटारा केवल और केवल इंस्टीट्यूशनल मैकेनिज्म के जरिए ही किया जाएगा, ना कि मीडिया में चल रहे दावों के आधार पर.
जस्टिस संदीप मेहता ने CJI को तीन अलग-अलग पत्र लिखकर राजस्थान हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा पर गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं और सेलेक्टिव केस लिस्टिंग के जरिए पक्षपात करने के आरोप लगाए थे.
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क्या बोले सीजेआई?
CJI सूर्यकांत ने साफ किया कि किसी जज के खिलाफ केवल आरोप लगना ही उनके खिलाफ कोई निष्कर्ष नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा कि जज को अपना पक्ष रखने और जवाब देने का निष्पक्ष अवसर दिया जाना जरूरी है.
सीजेआई ने कहा, ‘एक्टिंग चीफ जस्टिस के पद पर बने रहने, उनके तबादले या किसी अन्य प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा कोई भी निर्णय सभी तथ्यों और सबूतों पर विचार करने के बाद सक्षम संस्थागत प्राधिकरण द्वारा ही लिया जाएगा. जजों से जुड़ी व्यक्तिगत शिकायतों को सुप्रीम कोर्ट मीडिया में तय होने की अनुमति नहीं दे सकता.’
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जस्टिस मेहता की चिट्ठियों पर कॉलेजियम की नजर
साथ ही सीजेआई ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अलग-अलग हाईकोर्ट्स में चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर काम कर रहा है और जस्टिस संदीप मेहता द्वारा चिट्ठियों में उठाई गई चिंताओं का भी संज्ञान लिया गया है. हालांकि, इन चिट्ठियों में लिखे गए कंटेंट पर सार्वजनिक मंच पर बहस या फैसला नहीं किया जा सकता. साथ ही कहा कि जस्टिस मेहता की ओर से सौंपे गए दस्तावेजों और जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के जवाब दोनों की निष्पक्ष समीक्षा की जा रही है.
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क्या है पूरा विवाद?
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने CJI से मांग की थी कि राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के पद पर किसी अन्य राज्य से तुरंत नियमित चीफ जस्टिस की नियुक्ति की जाए. उन्होंने आरोप लगाया था कि जस्टिस शर्मा अगले महीने होने वाले अपने रिटायरमेंट से पहले प्रशासनिक अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं और रसूखदार पक्षकारों को फायदा पहुंचाने के लिए केस लिस्टिंग में हेरफेर की जा रही है.
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