हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Asian Games 2026election commissionBigg Boss 20

CAA के लागू होते ही इस राज्य में शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन, 11 मार्च को बताया 'काला दिन'

Protest Against CAA in Assam: असम में सीएए के लागू होने के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। कॉटन यूनिवर्सिटी में भी छात्रों ने सोमवार की रात विरोध प्रदर्शन किए। वहीं, विपक्षी दलों और क्षेत्रीय संगठनों ने पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है, जिसे देखते हुए पुलिस अलर्ट मोड पर आ गई है।

विज्ञापन
CAA के खिलाफ असम में शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन

Protest Against CAA In Assam : नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship Amendment Act) यानी सीएए 11 मार्च से देश में लागू हो गया। इस अधिनियम के लागू होने से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिल सकेगी। सत्ता पक्ष ने जहां इसका स्वागत किया है तो वहीं विपक्ष ने इसका विरोध करते हुए इसकी टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं। सीएए के लागू होने के बाद असम में विपक्षी दलों और संगठनों ने विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है।

असम में विरोध प्रदर्शन का आह्वान

बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया था कि लोकसभा चुनाव से पहले नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू होकर रहेगा। इसे लेकर असम में पिछले कुछ दिनों से तनावपूर्ण माहौल है।  अब सीएए लागू होने के बाद क्षेत्रीय संगठनों और विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन के आह्वान को देखते हुए  गुवाहाटी में सड़कों के किनारे बांस के बैरिकेड लगा दिए गए हैं। इसके साथ ही, विधान सभा और जनता भवन की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

कॉटन यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन

सीएए के लागू होने के बाद सोमवार रात को ही कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे। कॉटन यूनिवर्सिटी के सामने भी विरोध प्रदर्शन किया गया था।असम जातीय परिषद के अध्यक्ष  लुरिनज्योति गोगोई ने 11 मार्च को असम के लिए ‘काला दिन’ करार देते हुए पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी। असम जातीय परिषद का गठन 2019 के सीएए विरोधी प्रदर्शनों के बाद हुआ है।

विज्ञापन

असम में सीएए विरोध प्रदर्शनों का दिखा सबसे ज्यादा असर

गौरतलब है कि जब 2019 में सीएए  के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए थे तो असम में इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिला था। यहां विरोध प्रदर्शनों के दौरान करीब 5 लोगों की मौत हुई थी। देश के अन्य हिस्सों में सीएए का विरोध इस वजह से हो रहा है कि इसके तहत केवल गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को ही भारत की नागरिकता मिलेगी, जबकि  असम में लोग 24 मार्च 1971 के बाद असम में प्रवेश करने वाले किसी भी विदेशी शरणार्थी को नागरिकता देने के खिलाफ हैं। फिर चाहे वह किसी भी धर्म का हो।

यह भी पढ़ें: सीमा हैदर को क्या अब मिल सकेगी भारतीय नागरिकता? CAA लागू होने पर क्या बोली ‘पाकिस्तानी भाभी’ 

विज्ञापन

1985 के असम समझौते का उल्लंघन है सीएए

सीएए का विरोध करने वालों का कहना है कि यह 1985 के असम समझौते के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, जो केंद्र सरकार और एएएसयू (All Assam Students’ Union) के बीच हुआ था। एएएसयू ने बांग्लादेश से अवैध प्रवासियों के खिलाफ छह साल तक आंदोलन का नेतृत्व किया था। असम समझौते में 24 मार्च 1971 के बाद राज्य में आए विदेशियों को अवैध अप्रवासी के रूप में खोजने का प्रावधान है और राज्य में एनआरसी भी इसी कट-ऑफ तारीख के साथ तैयार की गई थी। हालांकि, CAA के साथ, मुसलमानों को छोड़कर, कट-ऑफ तारीख 2014 तक बढ़ा दी जाएगी।

यह भी पढ़ें: CAA लागू होने में क्यों लगे चार साल? 2019 में संसद से हो गया था पारित, कहां आईं अड़चनें

विज्ञापन

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Achyut Kumar

अच्युत कुमार द्विवेदी न्यूज 24 वेबसाइट में 19 दिसंबर 2023 से कार्यरत हैं। लगभग 6 साल से डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के रहने वाले हैं। इन्होंने अभी तक ईटीवी भारत, प्रभात खबर और जागरण न्यू मीडिया जैसे संस्थानों में काम किया है। इससे पहले, लखनऊ से संचालित इंडिया वाच और यूपी पत्रिका डॉट कॉम में काम किया था। अपने करियर में लगभग सभी विषयों (राजनीति, क्राइम, देश-विदेश, शिक्षा, क्रिकेट, लाइफस्टाइल, मनोरंजन आदि) पर लेखन का अनुभव रखते हैं। न्यूज 24 पर सबसे पहले और सबसे सटीक खबरें प्रकाशित हों और सही तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचें, इसी उद्देश्य के साथ सतत लेखन जारी है।
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola