कोयला भारत के ऊर्जा और औद्योगिक विकास की रीढ़ है, लेकिन दशकों से देश की इस बेशकीमती संपत्ति पर कोयला माफिया की बुरी नज़र रही है. हाल ही में देश के कानूनी और सुरक्षा ढांचे में हुए एक ऐतिहासिक बदलाव ने इस खेल के नियम पूरी तरह से बदल दिए हैं. अब तक सिर्फ खदानों और रसद मार्गों की रखवाली करने वाला केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF को अब पूरी तरह से अधिकार प्राप्त 'वैधानिक प्रवर्तन एजेंसी' बन गया है. यह बड़ा बदलाव खान और खनिज अधिनियम, 1957 में हुए हालिया संशोधनों से आया है. इसने CISF को रेलवे सुरक्षा बल की तर्ज पर सीधे कार्रवाई करने के अधिकार दे दिए हैं. पहले CISF का काम तस्करों को पकड़कर स्थानीय पुलिस को सौंपने तक सीमित था. इस लंबी प्रक्रिया में होने वाली देरी का फायदा उठाकर माफिया अक्सर कानून की पकड़ से बच निकलते थे. लेकिन अब, नए नियमों के तहत CISF अधिकारी सीधे कोर्ट में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं. वो स्थानीय पुलिस पर निर्भर हुए बिना, अवैध कोयले की तस्करी के शक में वाहनों और परिसरों की स्वतंत्र रूप से तलाशी ले सकते हैं. इस कानूनी ताकत ने ज़मीनी स्तर पर CISF की कार्रवाई को बेहद धारदार बना दिया है, जिससे अपराधियों में खौफ पैदा हुआ है.
क्या हुआ बदलाव?
पिछले एक साल के आंकड़ों में देखें CISF के आक्रामक रुख का असर झारखंड के बेरमो कोयलांचल स्थित सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की करगली यूनिट में साफ देखा जा सकता है.
बरामदगी में भारी उछाल: साल 2025 में, CISF ने यहां लगभग 24 लाख रुपये कीमत का 1,100 टन अवैध कोयला जब्त किया, जो पिछले साल यानी 2024 में जब्त किए गए 250 टन के मुकाबले चार गुना से भी ज्यादा है.
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छापेमारी और जब्ती: छापों की संख्या भी 2024 में 128 से बढ़कर 2025 में 220 हो गई. इसके अलावा, तस्करी में शामिल 102 वाहनों को पकड़ा गया, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा सिर्फ 12 था.
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करोड़ों की बचत: सिर्फ एक यूनिट में हुई इस सख्त कार्रवाई ने सरकारी खजाने को सालाना 3 से 4 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान से बचाया है.
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माफिया के नए पैंतरे और CISF का नाइट एम्बुश
सुरक्षा एजेंसियों की नज़र से बचने के लिए कोयला माफिया लगातार अपने तरीके बदलते रहते हैं. हाल ही में तस्करों ने बड़े ट्रकों तक कोयला पहुंचाने के लिए संकरे जंगलों और गांव के रास्तों से मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया था. इसके जवाब में, CISF ने पांच दिनों का एक विशेष नाइट एम्बुश (रात में घात लगाकर) अभियान चलाया और अवैध कोयले से लदी 24 मोटरसाइकिलों को जब्त कर माफिया के इस नए जुगाड़ को भी नाकाम कर दिया.
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देश भर में चल रहा है महा-अभियान
करगली यूनिट की यह कार्रवाई सिर्फ एक बानगी है. पूरे देश के कोयला क्षेत्रों में CISF द्वारा इसी तरह के हाई-टेक और सख्त अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे माफिया के हाथों में जाने वाले हजारों टन कोयले को सुरक्षित बचाया जा रहा है. केवल खदानों की चारदीवारी की सुरक्षा से आगे बढ़कर कानून का सीधा डंडा चलाने वाला CISF का यह नया रूप यकीनन एक गेम-चेंज है. बल सुनिश्चित कर रहा है कि भारत की राष्ट्रीय संपदा से सिंडिकेट्स की जेबें न भरें, बल्कि यह कोयला देश की तरक्की का ईंधन बने.
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