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कैसी होगी भारत की वो सीक्रेट टनल, जिसका नाम सुनते ही कांपेगा पाकिस्तान; जानिए क्या है पड़ोसी का डर

हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. वैज्ञानिकों के सर्वेक्षण में कोकसर और रोहतांग क्षेत्र को सुरंग और बैराज निर्माण के लिए सही पाया गया है. इस परियोजना के तहत चंद्रा नदी के पानी को 8.6 किलोमीटर लंबी सुरंग के जरिए ब्यास नदी तक पहुंचाने की योजना है.

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Credit: AI

हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना एक बार फिर चर्चा में है. हाल ही में वैज्ञानिकों ने कोकसर और रोहतांग क्षेत्र की चट्टानों का सर्वेक्षण कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस क्षेत्र की चट्टानें काफी मजबूत हैं, इसलिए यहां सुरंग और बैराज का निर्माण तकनीकी रूप से सही रहेगा. साथ ही यहां लैंडस्लाइड और भूगर्भीय जोखिम भी कम पाए गए हैं. इस परियोजना के तहत चिनाब नदी की प्रमुख सहायक चंद्रा नदी के पानी को ब्यास नदी तक पहुंचाया जाएगा. इसके लिए चंद्रा नदी पर एक बैराज बनाया जाएगा और वहां से पानी को 8.6 किलोमीटर लंबी सुरंग के जरिए ब्यास बेसिन तक भेजा जाएगा. प्रस्तावित सुरंग की चौड़ाई करीब 7.2 मीटर रखी जाएगी.

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कैसे काम करेगा प्रोजेक्ट?

योजना के मुताबिक, चंद्रा नदी पर बनने वाले बैराज में पानी इकट्ठा किया जाएगा. जरूरत के मुताबिक, इस पानी को सुरंग के जरिए ब्यास बेसिन में छोड़ा जाएगा. इस पानी का इस्तेमाल बिजली बनाने, सिंचाई और भाखड़ा बांध में किया जा सकेगा. इसके अलावा उत्तर भारत के उन इलाकों तक भी पानी पहुंचाया जा सकेगा जहां जल की कमी होती है. चंद्रा नदी लाहौल-स्पीति क्षेत्र से निकलती है और आगे चलकर भागा नदी से मिलती है. दोनों नदियों के संगम से चिनाब नदी बनती है, जो जम्मू-कश्मीर से होकर पाकिस्तान में एंट्री करती है. दूसरी ओर ब्यास नदी कुल्लू और मंडी से होकर पंजाब की ओर बहती है और आगे सतलुज नदी में मिल जाती है. दोनों नदी प्रणालियों के बीच मौजूद पहाड़ी रास्ते को सुरंग के जरिए पार किया जाएगा.

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सिंधु जल समझौते से क्या है कनेक्शन?

भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1960 में सिंधु जल समझौता हुआ था. इसके तहत रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का ज्यादातर पानी भारत को मिला, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का जल पाकिस्तान के हिस्से में गया. हालांकि समझौते के तहत भारत को चिनाब नदी पर जल विद्युत परियोजनाएं विकसित करने और सीमित मात्रा में पानी इस्तेमाल करने का अधिकार मिला है.

पाकिस्तान पर क्या पड़ेगा असर?

इस परियोजना से पाकिस्तान का पानी पूरी तरह बंद नहीं होगा, लेकिन भारत चिनाब बेसिन के पानी का ज्यादा इस्तेमाल कर सकेगा. चंद्रा नदी का कुछ पानी चिनाब बनने से पहले ही ब्यास बेसिन की ओर मोड़ दिया जाएगा. इससे एक्सट्रा पानी का इस्तेमाल सिंचाई, बिजली बनाने और जल भंडारण के लिए किया जा सकेगा. मौजूदा वक्त में चिनाब का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान की ओर बह जाता है. परियोजना पूरी होने के बाद भारत के पास पानी इकट्ठा करने और उसका इस्तेमाल बढ़ाने की क्षमता होगी. यही वजह है कि चिनाब नदी पर बनने वाली परियोजनाओं पर पाकिस्तान लगातार नजर रखता है. पाकिस्तान का मानना है कि ऐसी योजनाएं नदी के बहाव पर असर डाल सकती हैं, जबकि भारत का कहना है कि वो सिंधु जल समझौते के तहत मिले अधिकारों का ही इस्तेमाल कर रहा है.

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बाढ़ और आपदाओं से भी सुरक्षा

प्रस्तावित परियोजना को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर सके. बैराज में पांच बड़े स्लिपवे गेट लगाए जाएंगे, जिनकी मदद से एक्सट्रा पानी को सुरक्षित तरीके से छोड़ा जा सकेगा. अगर किसी वजह से एक गेट काम नहीं करता है, तो बाकी गेट बाढ़ के पानी को कंट्रोल कर सकेंगे.

कितना होगा खर्च?

इस परियोजना पर अनुमानित लागत 8,000 करोड़ रुपये से 20,000 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है. फाइनल खर्च सुरंग की लंबाई, डिजाइन और अन्य बुनियादी ढांचे पर निर्भर करेगा. हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में निर्माण कार्य आसान नहीं है. यहां निर्माण सामग्री पहुंचाने के लिए पहले सड़कें विकसित करनी होंगी. इसके अलावा ज्यादा ऊंचाई और हर साल 4 से 5 महीने होने वाली भारी बर्फबारी भी परियोजना की लागत और समयसीमा को प्रभावित कर सकती है.

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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