कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि उसने कैंसर की दवाओं पर अत्यधिक मुनाफे को नियंत्रित करने का बड़ा फैसला लिया है. सरकार का उद्देश्य कंपनियों और विक्रेताओं के बेतहाशा मुनाफे पर लगाम लगाना है, ताकि मरीजों को वाजिब दाम पर दवाइयां मिल सकें और कारोबारियों का भी उचित मुनाफा बना रहे. सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार जल्द ही कैंसर की उन दवाओं की आधिकारिक सूची जारी करेगी, जिन पर 30 फीसदी ट्रेड मार्जिन की सीमा लागू होगी.
अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ट्रेड मार्जिन पर 30% की कैप लगने से दवाओं के खुदरा मूल्य (MRP) में 70 प्रतिशत तक की बड़ी कमी आने की उम्मीद है. इससे मरीजों की जेब से इलाज पर होने वाले खर्च में काफी कमी आएगी.
समय-समय पर अपडेट की जाएगी लिस्ट: सॉलिसिटर जनरल
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि यह सूची समय-समय पर बाजार के बदलावों और सार्वजनिक स्वास्थ्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपडेट की जाएगी, ताकि अन्य जरूरी दवाओं को भी इसमें शामिल किया जा सके. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बहुत सस्ती दवाओं को इस नियम से बाहर रखा जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पूरे दवा बाजार की हो समीक्षा
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस कदम का दायरा और बढ़ाने पर जोर दिया. अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दवाओं की कीमतों की निगरानी केवल कैंसर की दवाओं तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे पूरे दवा बाजार पर लागू किया जाना चाहिए ताकि आम लोगों को हर तरह की बीमारी में सस्ती दवाएं मिल सकें.
सुप्रीम कोर्ट ने गैर-अनुसूचित दवाओं की शुरुआती कीमतों के नियमन और मेडिकल उपकरणों की कीमतों पर कैप लगाने की मांग वाली याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर की तारीख तय की है.