एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा. पीयूष गोयल ने आरोप लगाते हुए कहा कि यूपीए सरकार में मुख्य चुनाव आयुक्तों (CEC) को मंत्री और गवर्नर के पद दिए गए. उन्होंने चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर कहा कि कांग्रेस ने संविधान के हर पहलू को ध्वस्त किया है. कांग्रेस को अपना पुराना रिकॉर्ड याद रखना चाहिए. केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि वर्तमान की मोदी सरकार ने हमेशा चुनाव आयोग को स्वतंत्र और स्वायत्त तरीके से काम करने की पैरवी की है.
कांग्रेस कार्यकाल का किया जिक्र
दिल्ली में मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग को लेकर सवाल खड़े कर रही है, जबकि उसके अपने कार्यकाल में ऐसे कई फैसले हुए, जिनकी समीक्षा की जानी चाहिए. उन्होंने राहुल गांधी के हालिया बयानों और उनके राजनीतिक रवैये की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को लेकर दोहरा मापदंड अपनाती है.
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पूर्व CEC MS गिल और TN शेषन का दिया उदाहरण
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल और टीएन शेषन का उदाहरण दिया. उन्होंने एमएस गिल के चुनाव आयोग से संसद और फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल तक पहुंचने का जिक्र करते हुए सवाल उठाए कि संवैधानिक पदों पर काम करने वाले अधिकारियों को बाद में राजनीतिक जिम्मेदारियां दिए जाने के पीछे क्या कारण था? इसके अलावा पीयूष गोयल ने टीएन शेषन की नियुक्ति का भी जिक्र किया.
उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल समाप्त होने के करीब दो महीने के भीतर टीएन शेषन को गुजरात का राज्यपाल नियुक्त किया गया था. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संवैधानिक पदों पर रहने वाले व्यक्तियों को बाद में राजनीतिक पद दिए जाने के मामलों पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
नवीन चावला की नियुक्ति पर भी उठाए सवाल
पीयूष गोयल ने 2005 में नवीन चावला को चुनाव आयुक्त नियुक्त किए जाने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने इस नियुक्ति को लेकर तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व और सोनिया गांधी की भूमिका पर सवाल किए. पीयूष गोयल ने पूछा कि उस समय केंद्र में सरकार किसकी थी और नियुक्ति प्रक्रिया की जिम्मेदारी किसकी थी.
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