लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने INDIA ब्लॉक के 10 नेताओं के साथ मिलकर सु्प्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. 12 जुलाई 2026 को दिल्ली में विरोध मार्च के बाद INDIA ब्लॉक के नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली, लेकिन बता दें कि यह याचिका संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत दायर की गई है. अनुच्छेद-32 के तहत भारतीय नागरिकों को संवैधानिक उपचारों का अधिकार मिला है. संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर ने भी अनुच्छेद-32 को ‘संविधान का हृदय और आत्मा’ कहा था. अनुच्छेद-32 के तहत सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट भारतीयों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए 5 प्रकार के आदेश जारी कर सकता है तो आइए इस अनुच्छेद के बारे में जानते हैं…
क्या है अनुच्छेद-32 और क्या हैं विपक्ष की मांगें?
बता दें कि संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत भारतीय नागरिकों को संवैधानिक उपचारों का अधिकार दिया गया है. यह अधिकार स्वयं में एक प्रकार का मौलिक अधिकार है, जो भारतीय नागरिकों को मौलिक अधिकारों का हनन या उल्लंघन होने की स्थिति में सीधे देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का अधिकार देता है. क्योंकि विपक्ष ने चुनाव आयोग पर भारतीयों के वोट देने के अधिकार का हनन करने का आरोप लगाया, इसलिए इस अनुच्छेद के तहत याचिका दायर करके SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई है. SIR के जरिए मतदाता सूची से हटाए गए नामों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाए. चुनाव आयोग के ऑनलाइन डेटाबेस की चेकिंग करके उसकी कानूनी वैधता जांची जाए.
क्या हैं अनुच्छेद-32 की विशेषताएं और शक्तियां?
बता दें कि अनुच्छेद-32 के तहत मौलिक अधिकारों के हनन मामले में भारतीयों को सीधे सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार मिलता है, जबकि सामान्य मामलों में सबसे पहले निचली अदालत में अपील करनी होती है. निचली अदालत के फैसले के बाद ही स्टेप वाइज सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकते हैं. इसके अलावा अगर इस अनुच्छेद के तहत मौलिक अधिकारों के हनन मामले में याचिका दायर होती है तो उसके द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करना और इंसाफ देना सुप्रीम कोर्ट का संवैधानिक कर्तव्य बन जाता है.
क्या हैं अनुच्छेद-32 के तहत सुप्रीम कोर्ट की शक्तियां?
बता दें कि अनुच्छेद-32 के तहत सुप्रीम कोर्ट को भी कुछ शक्तियां दी गई हैं, जिनका इस्तेमाल करके सुप्रीम कोर्ट मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए 5 प्रकार के आदेश जारी कर सकता है. जैसे किसी भारतीय को अवैध तरीके के हिरासत में लेने के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण आदेश जारी हो सकता है. देश के किसी भी सरकारी अधिकारी या सरकारी संस्था को उसका कर्तव्य निभाने का आदेश देते हुए परमादेश दिया जा सकता है. अगर निचली अदालतें अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर काम करती हैं तो उन्हें रोकने के लिए प्रतिषेध आदेश जारी किया जा सकता है. देश की किसी निचली अदालत या प्राधिकरण का फैसला गलत लगे तो उसे रद्द करने के लिए उत्प्रेषण आदेश जारी किया जा सकता है. किसी व्यक्ति को किसी अधिकार से किसी सरकारी पद पर बैठाया गया है, यह सवाल पूछते हुए अधिकार पृच्छा आदेश सुप्रीम कोर्ट जारी कर सकता है.
राहुल गांधी ने अनुच्छेद-32 का इस्तेमाल क्यों किया?
बता दें कि राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और INDIA ब्लॉक के नेताओं ने अनुच्छेद-32 के तहत ही याचिका क्यों दायर की? इसके पीछे यह तर्क दिया गया है कि चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराकर लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटकर उनके मताधिकार का हनन किया है. इसके लिए चुनाव आयोग ने सॉफ्टवेयर और फॉर्म-6 बदलकर वोट चोरी किए. जबकि भारतीय संविधान के तहत ‘वोट देने का अधिकार’ भारतीयों को मिला है, जो मौलिक होने के साथ-साथ लोकतांत्रिक अधिकार भी है. मताधिकार और चुनावी निष्पक्षता के हनन को आधार बताते हुए ही विपक्ष ने अनुच्छेद-32 के तहत याचिका दायर की.