पांच राज्यों में आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लिया है. विपक्षी दल जल्द ही उनके खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन या महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में जुटे हैं. अगर विपक्ष संसद में महाभियोग का नोटिस देता है तो देश में पहली बार होगा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग आएगा. एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इंडिया गठबंधन के सहयोगियों से बातचीत हो चुकी है और सभी दल विभिन्न राज्यों में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची की गहन संशोधन प्रक्रिया को लेकर CEC के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तैयार हैं.

SIR विवाद क्यों गरमाया?

विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप लगा रहा है. कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए जानबूझकर विपक्षी समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं. राहुल गांधी ने पिछले साल से ही इस मुद्दे पर बड़ा अभियान चलाया और वोट चोरी के गंभीर आरोप लगाए. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन अदालत ने प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई. विपक्ष का कहना है कि SIR से लाखों वैध मतदाताओं के नाम कट सकते हैं, जिससे लोकतंत्र पर असर पड़ रहा है.

---विज्ञापन---

क्या है हटाने की प्रक्रिया?

2023 के मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना आसान नहीं है. संविधान के अनुसार, उन्हें केवल 'महाभियोग' के जरिए ही हटाया जा सकता है, जो ठीक वैसी ही प्रक्रिया है जैसी सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने के लिए अपनाई जाती है. यानी केवल संसद के दोनों सदनों में महाभियोग के जरिए ही पद से हटाया जा सकता है. प्रस्ताव लोकसभा या राज्यसभा –किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है.

---विज्ञापन---

लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं, तभी नोटिस विचार के लिए स्वीकार होगा. संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है. यह प्रक्रिया बेहद कठिन है और इतिहास में कभी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव नहीं आया.