NEET-UG पेपर लीक मामले में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की है. यह चार्जशीट 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की गई है. सीबीआई ने राउज एवेन्यू कोर्ट में पेपर लीक मामले में चार्जशीट दाखिल की है. यह चार्जशीट बुधवार को पेपर लीक मामले की सुनवाई के लिए बनाई गई स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के सामने पेश की जाएगी. चार्जशीट सीबीआई की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने ओर से दाखिल हुई है.

सीबीआई ने यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रहलाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवलदार को आरोपी बनाया है. ये न्यायिक हिरासत में हैं.

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आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, सबूत नष्ट करने समेत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक कदाचार तथा सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत आरोप लगाए गए हैं. सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक साक्ष्यों का जिक्र किया है.

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बता दें, भारत सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने 12 मई 2026 को NEET-UG 2026 परीक्षा में अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों को लेकर लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. यह परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी. शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने 12 मई 2026 को एफआईआर दर्ज कर तत्काल कार्रवाई शुरू की. जांच के लिए 72 अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ 8 साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की कई टीमें गठित की गईं थीं.

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महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली समेत कई राज्यों में 92 स्थानों पर छापेमारी की गई, जहां से डिजिटल और संचार उपकरण, दस्तावेज सहित कई आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई. इन सभी की फॉरेंसिक इमेजिंग और विश्लेषण कराया गया. सीबीआई ने एफआईआर दर्ज होने के कुछ ही सप्ताह के भीतर प्रश्नपत्र लीक के स्रोत का पता लगा लिया. जांच में पेपर लीक के स्रोत से लेकर लाभ पाने वाले अभ्यर्थियों तक की पूरी सीरीज का खुलासा किया गया.

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इस मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मई 2026 को हुई थी. अब तक कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और भौतिकी विषय के 3 विशेषज्ञ भी शामिल हैं. जांच में यह भी सामने आया कि कई बिचौलियों ने लीक प्रश्नपत्र हासिल कर उन्हें आगे बांटा था. ऐसे कई बिचौलियों को भी गिरफ्तार किया गया है. इसके अलावा कोचिंग संस्थानों से जुड़े दो व्यक्तियों को भी गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने इन विशेषज्ञों से लीक प्रश्नपत्र प्राप्त किए थे.

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सीबीआई ने मामले में मनी ट्रेल की भी जांच की और आरोपियों के कई बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाता फ्रीज कर दिया. जांच के दौरान डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, हस्तलेखन विशेषज्ञों की राय और अकादमिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट भी हासिल की गई. इन रिपोर्टों से पुष्टि हुई कि आरोपियों ने परीक्षा की तारीख से पहले ही लीक प्रश्नों का प्रसार किया था.

सीबीआई ने कहा है कि मामले की आगे की जांच और फॉरेंसिक विश्लेषण जारी है तथा एजेंसी यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि इस तरह के अपराधों में शामिल सभी दोषियों को कानून के तहत कड़ी सजा मिले.