Captain Anshuman Singh Wife Emotional Video: कॉलेज में प्यार हुआ, 8 साल हमारी लव स्टोरी चली, 5 महीने पहले ही शादी हुई थी, लेकिन सोचा नहीं था कि अचानक और इस तरह मेरी मांग का सिंदूर मिट जाएगा। अब मेरे पास सिर्फ उनकी यादें हैं। 8 साल 5 महीने की यादें, इन्हीं के सहारे अपनी जिंदगी गुजार दूंगी। उनके सपनों को पूरा करुंगी। 18 की रात को आखिरी बात हुई थी, पर्सनल बातें हुई और कुछ फ्यूचर से जुड़ी बातें हुईं, लेकिन 19 की सुबह सारे सपने टूट गए।
एक फोन आया, जिससे वो बुरी खबर मिली और एक रात में मेरी जिंदगी बदल गई। लाल जोड़ा सफेद साड़ी में बदल गया, मांग का सिंदूर मिट गया। सपनों का आशियाना बनाना था, उससे पहले वे तिरंगे में लिपटकर आ गए। ये रुला देने वाली कहानी, उस लड़की स्मृति ने सुनाई, जिसके बलिदानी पति कैप्टन अंशुमन को उनकी बहादुरी के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कीर्ति चक्र देकर सम्मानित किया। स्मृति का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, जिसे सुनकर आपकी आंखें भी नम हो जाएंगी। आप भी उस जांबाज लड़की को सलाम करेंगे, जिसने सबकुछ खोकर भी जीना सीख लिया।
स्मृति ने बताया कैसे बलिदान हुए पति अंशुमन?
अपनी कहानी सुनाते हुए स्मृति ने बताया कि उनके पति कैप्टन अंशुमन कैसे बलिदान हुए? अंशुमनपंजाब रेजिमेंट की 26वीं बटालियन में थे। वे भारतीय सेना के मेडिकल कोर में डॉक्टर थे। जुलाई 2023 में वे ऑपरेशन मेघदूत का हिस्सा बने। सियाचिन में बतौर मेडिकल ऑफिसर नियुक्ति मिली। 18 जुलाई को उनसे आखिरी बात हुई थी। नए घर, बच्चों और फ्यूचर को लेकर कई प्लान बनाए थे। इतनी बातें की, जितनी पिछले 5 महीने में नहीं की थी।
19 जुलाई 2023 की सुबह करीब 3 बजे सियाचिन में आर्मी कैंप में हथियार रखने वाली जगह भीषण आग लग गई। इस आग से हुए धमाकों के बाद भड़की आग ने आस-पास बने मकानों को चपेट में ले लिया था। ऐसे ही एक मकान में फंसे लोगों को बचाते हुए कैप्टन अंशुमन ने अपनी जान गंवाई। उन्होंने लोगों को बचा लिया, लेकिन खुद बुरी तरह झुलस गए। सुबह 7 बजे अंशुमन के बलिदानी होने की खबर आ गई और पूरे परिवार की जिंदगी बदल गई।
शादी के 2 महीने बाद अंशुमन चले गए थे सियाचिन
स्मृति ने बताया कि अंशुमन शादी के 2 महीने बाद ही सियाचिन चले गए थे। ऐसे में शादी के बाद हम सिर्फ 2 महीने साथ रहे, 3 महीने से फोन पर ही बात हो रही थी। इंजीनियरिंग कॉलेज में पहली मुलाकात हुई थी। पहली नजर में मुझे वे पसंद आए थे, लेकिन सिर्फ एक महीना मुलाकातों का सिलसिला चला, फिर वे मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेने चले गए। एक दिन फोन आया, उसके बाद 8 साल बातें-मुलाकातें हुई।
परिवार को दोनों ने बता रखा था और वे शादी के मान गए थे। शादी हुई और 2 महीने खूब घूमे, परिवार के साथ समय बिताया। फिर अंशुमन सियाचिन चले गए। 18 जुलाई 2023 को आखिरी बात बात हुई। 19 जुलाई को वे बलिदानी हुए। 22 जुलाई 2023 को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भागलपुर में अंशुमन को आखिरी विदाई दी गई। अंशुमन चले गए, लेकिन अपनी यादें छोड़ गए। अंशुमन पर पूरे परिवार को गर्व है।
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