पश्चिम बंगाल का सीमावर्ती इलाका लंबे समय से घुसपैठ के लिहाज से संवेदनशील माना जाता रहा है, जहां नदी और दलदली क्षेत्रों के कारण सुरक्षा चुनौती बनी रहती है. इन परिस्थितियों को देखते हुए Border Security Force (बीएसएफ) लगातार नए और प्रभावी तरीकों पर काम कर रही है ताकि सीमा को और ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सके. इसी कड़ी में अब एक नया और अलग तरह का प्लान तैयार किया जा रहा है, जिसका मकसद घुसपैठ पर पूरी तरह रोक लगाना है.

पश्चिम बंगाल का इलाका यहां से हमेशा घुसपैठ या फिर घुसपैठ की कोसिस होते रहती है, अब एक नया प्लान बीएसएफ यानी बॉर्डर सिक्युरिटी फोर्स ने तैयार किया हैं.

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क्या है यह प्लान

बीएसएफ के सूत्रों ने न्यूज़ 24 को जानकारी देते हुए कहा कि विशेष करके इंडो- बांग्ला बॉर्डर पर विशेष सतर्कता के लिये इस तरह की सुरक्षा का विचार किया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक सबसे ज्यादा घुसपैठ की संभावना ,फेनी नदी,इच्छामती नदी: गंगा/पद्मा नदी, मुहुरी नदी से होती है, कियोकि इन नदियों का आधा भाग भारत मे तो आधा भाग बांग्लादेश में बहता है.

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आपको बता दें कि फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, अभी इसकी योजना तैयार की जा रही है. क्योंकि भारत और बांग्लादेश की सीमा लगभग 5 हजार किलोमीटर की है और इतनी लंबी सीमा पर बाड़ लगाना संभव नहीं है, इसलिए इस तरह के विचार किए जा रहे हैं कि सीमा पर जहरीले साँप, बिच्छू और मगरमच्छ रखे जाएं. लगभग 5 हजार किलोमीटर की भारत-बांग्लादेश सीमा में से करीब 180 किलोमीटर का इलाका नदी और दलदली है, जहां बाड़ लगाना बहुत मुश्किल है. यही वजह है कि दलदली इलाके का फायदा उठाकर घुसपैठ की कोशिशें होती रहती हैं. हालांकि बीएसएफ इन्हें रोकने में सफल रहती है, लेकिन सावधानी के तौर पर इस प्लान को लागू करने पर विचार किया जा रहा है.

डिटरेंस-फर्स्ट’ स्ट्रैटेजी

  • इसी प्लान के तहत इलाको की पहचान कराई जा रही है जहाँ पर जहरीले सांप,बिछु औऱ मगरमच्छ को बॉर्डर पर रखा जाएगा.
  • वर्तमान में कैसे होती है भारत और बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा.
  • वर्तमान में बीएसएफ सीमा पर नफरी करने के साथ ही सुरक्षा के लिए ड्रोन, सेंसर, इंफ्रारेड कैमरे और कई तरह के अपग्रेडेड टेक्नोलॉजी का सहारा ले रही है.