उद्धव या BJP… शिंदे को डर किससे? 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' के बीच एकनाथ शिंदे को 'खुला चैलेंज' भी मिला

बीएमसी में बहुमत का आंकड़ा 114 है. भाजपा ने 89 सीटें जीती हैं और शिवसेना (शिंदे) के पास 29 सीटें हैं. दोनों के पास कुल मिलाकर 118 सीटें हो जाती हैं, जो बहुमत के आंकड़े 114 से काफी ज्यादा है.

Uddhav Thackeray, Eknath Shinde, Devendra Fadnavis

अब सबकी निगाहें शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर हैं.

विज्ञापन

बीएमसी चुनाव में एनडीए की बड़ी जीत के बाद मुंबई में ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ लौट आई है. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना का कहना है कि चुनाव खत्म हो गए हैं, लेकिन ‘असली राजनीति अभी शुरू होनी बाकी है.’ भाजपा को सबसे ज्यादा वार्डों में जीत मिली है. यह ठाकरे परिवार के लिए झटका है, क्योंकि पिछले तीन दशक से ठाकरे परिवार ही बीएमसी में काबिज था.

सबकी नजर शिंदे गुट पर

अब सबकी निगाहें शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर हैं. एकनाथ शिंदे की शिवसेना को बीएमसी चुनाव में 29 सीटें मिली हैं. उनकी पार्टी भाजपा की सहयोगी भी है. चुनाव परिणामों के बाद शिंदे खेमे ने अपने पार्षदों को मुंबई के एक पांच सितारा होटल में भेजना शुरू कर दिया, जिससे शहर के राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई कि आखिर एकनाथ शिंदे को किसका डर है.

विज्ञापन

क्या कहते हैं आंकड़े?

शिंदे टीम की रिजॉर्ट पॉलिटिक्स को समझने के लिए, पहले बीएमसी चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालते हैं. 227 वार्डों वाली बीएमसी में बहुमत का आंकड़ा 114 है. भाजपा ने 89 सीटें जीती हैं और शिवसेना (शिंदे) के पास 29 सीटें हैं. दोनों के पास कुल मिलाकर 118 सीटें हो जाती हैं, जो बहुमत के आंकड़े 114 से काफी ज्यादा है. उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, जिसने अकेले चुनाव लड़ा था, ने भी तीन वार्ड में जीत हासिल की है. उम्मीद जताई जा रही है कि वह अपना समर्थन महायुति को ही देंगे.

दूसरी तरफ, शिवसेना (UBT) ने 65, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने छह और एनसीपी (शरद पवार) ने एक वार्ड जीता है. यह संख्या 72 तक पहुंचती है. कांग्रेस ने 24 वार्ड, एआईएमआईएम ने आठ और समाजवादी पार्टी ने दो जीते हैं. यदि विपक्ष एकजुट होने का फैसला करता है, तो यह आंकड़ा 106 तक पहुंच जाएगा, जो बहुमत से आठ कम है. लेकिन अगर विपक्ष चाहे तो खेला कर सकती है. बस उसे आठ पार्षद ही अपने पाले में लाने हैं. हालांकि, इसकी संभावना कम ही नजर आ रही है.

शिंदे को डर किसका?

इसी चुनावी गणित के बीच शिंदे टीम कोई जोखिम नहीं लेना चाहती. अगर विपक्ष एकजुट होने में कामयाब हो जाता है, तो उन्हें पासा पलटने के लिए महायुति के केवल आठ पार्षदों को अपनी तरफ लाने की जरूरत होगी. तो अब सवाल ये है कि ऐसे में एकनाथ शिंदे को डर किससे है, उद्धव ठाकर से या फिर भाजपा से?

विज्ञापन

उद्धव ठाकरे के मुताबिक, शिंदे भाजपा से डरे हुए हैं. उन्होंने कहना है कि जिन्होंने एक बार तोड़ी है, वे दोबारा कर सकते हैं. मेयर पद को लेकर एनडीए के भीतर खींचतान चल रही है. जहां भाजपा अपने पार्षद को मेयर बनाना चाहते हैं, वहीं शिंदे पर इस पद पर दावा करने का दबाव है. मुंबई में दशकों से शिवसेना का मेयर रहा है, और इस बार इसे खोना बाल ठाकरे की विरासत पर कब्जा करने के उनके कोशिश को नुकसान पहुंचाएगा. शिंदे को पिछले साल चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था और डिप्टी सीएम के पद से संतोष करना पड़ा था. अब बीएमसी मेयर पद खोना एक और हार होगी और ठाकरे परिवार को उन पर हमला करने का मौका मिलेगा.

इसलिए, मुंबई के सियासी हलकों में यह चर्चा आम है कि शिंदे टीम का रिजॉर्ट वाला कदम सिर्फ विपक्ष की योजनाओं को नाकाम करने के लिए नहीं, बल्कि अपने सहयोगी भाजपा के लिए भी है. हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि वह और शिंदे दूसरे एनडीए नेताओं के साथ मिलकर मेयर पद पर फैसला करेंगे.

विज्ञापन

शिंदे को चुनौती

शिवसेना (उद्धव गुट) ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में, शिंदे टीम को चुनौती दी है. संपादकीय में कहा गया है, ‘शिवसेना ने मुंबई को 23 मराठी मेयर दिए हैं, क्या अब भी यह परंपरा जारी रहेगी?’ साथ ही इसमें मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्री शिंदे के बीच ‘खुली खींचतान’ का दावा भी किया गया है. संपादकीय में कहा गया है कि ठाकरे भाइयों ने मुंबई की सुरक्षा के लिए कड़ा संघर्ष किया.

संपादकीय में कहा गया, ‘नगर निकाय चुनाव खत्म हो गए हैं, नतीजे आ गए हैं. असली राजनीति अभी शुरू होनी बाकी है.’ इससे संकेत मिलते हैं कि मेयर का चुनाव आसान नहीं होगा.

विज्ञापन

उद्धव ठाकरे के बयान के मायने

उद्धव ठाकरे ने शनिवार को अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा था कि उनका सपना मुंबई में शिवसेना (UBT) का मेयर बनाना है. उन्होंने कहा, ‘और अगर ईश्वर की इच्छा हुई, तो यह सपना पूरा होगा.’ इस टिप्पणी का जवाब देते हुए, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मजाक में पूछा कि क्या ठाकरे ने ‘देवा’ शब्द का इस्तेमाल उनके (फडणवीस) लिए किया या भगवान के लिए. उन्होंने कहा, ‘मुझे भी ‘देवा’ कहा जाता है; इसलिए मैं पूछ रहा हूं . वैसे ऊपर वाले भगवान ने तय कर लिया है कि महायुति का ही मेयर होगा.’

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Arif Khan

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
... और पढ़ें

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ