केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद संसद पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान का संसद भवन के मकरद्वार पर भाजपा नेताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया. यह सिर्फ औपचारिक स्वागत नहीं था, बल्कि इसके जरिए बीजेपी ने अपने राजनीतिक संदेश की शुरुआत भी कर दी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ने एक तरफ प्रदर्शनकारियों के गुस्से को शांत करने के लिए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया, वहीं दूसरी तरफ अब इस पूरे घटनाक्रम को अपने पक्ष में मोड़ने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले सामने आई स्वागत की तस्वीरों को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
धर्मेंद्र प्रधान कुर्मी समाज से आते हैं, जिसे ओबीसी की प्रभावशाली जातियों में गिना जाता है. ऐसे में बीजेपी इस पूरे मुद्दे को सामाजिक प्रतिनिधित्व के नजरिए से भी पेश करने की कोशिश कर रही है. उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों, खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश की अनेक विधानसभा सीटों पर कुर्मी और व्यापक ओबीसी वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाता है.
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इसी रणनीति को आगे बढ़ाते हुए बीजेपी के ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. लक्ष्मण ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने सवाल किया कि राहुल गांधी तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का इस्तीफा क्यों नहीं मांगते? लक्ष्मण ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ओबीसी समाज के मजबूत नेता हैं. उन्होंने सीधे तौर पर तो यह नहीं कहा, लेकिन उनके बयान से यह संदेश देने की कोशिश जरूर दिखी कि राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि वे ओबीसी समाज से आते हैं.
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उधर, कांग्रेस ने अपना हमला और तेज कर दिया है. कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि केवल मंत्री का इस्तीफा काफी नहीं है. अब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को देश को यह बताना होगा कि छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस को कथित तौर पर पैलेट गन चलाने की अनुमति किसने दी. उन्होंने इस पूरे मामले में सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की.
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बीजेपी के सहयोगी दल जनता दल (यूनाइटेड) भी सरकार के बचाव में उतर आया है. जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के सलाहकार 'नक्सली सोच' और 'अराजकता' फैलाने वाले हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राजद के शासनकाल में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के अध्यक्ष तक को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन विपक्ष आज उन घटनाओं को भूलकर केवल राजनीतिक आरोप लगा रहा है.
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साफ है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सियासी लड़ाई अब केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गई है. बीजेपी इसे ओबीसी सम्मान, विपक्ष के दोहरे मानदंड और पुराने पेपर लीक मामलों से जोड़कर नया राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रही है, जबकि विपक्ष छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और सरकार की जवाबदेही को मुख्य मुद्दा बनाए हुए है.
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अब नजर इस बात पर रहेगी कि संसद के भीतर और बाहर छिड़ी यह सियासी जंग किस पक्ष के नैरेटिव को जनता के बीच ज्यादा मजबूती देती है.