ओडिशा की राजनीति में शनिवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. बीजू जनता दल (BJD) ने 21 मार्च को अपने 6 विधायकों को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निलंबित कर दिया. इसका कारण राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और अन्य दल-विरोधी गतिविधियां बताई जा रही है. पूर्व सीएम नवीन पटनायक की अध्यक्षता वाली पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति ने विधायकों को जारी कारण बताओ नोटिसों के जवाबों की जांच के बाद यह सख्त फैसला लिया. अनुशासन समिति की सिफारिश पर अमल करते हुए बीजेडी ने स्पष्ट संदेश दिया कि सामूहिक निर्णयों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं होगा.
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सस्पेंड हुए विधायकों के नाम
निलंबित विधायकों में चक्रमणि कन्हार (बालीगुड़ा), नबकिशोर मलिक (जयदेव), सौविक बिस्वाल (चौदवार-कटक), सुभासिनी जेना (बस्ता), रामकांत भुईं (तिरतोल) और देवी रंजन त्रिपाठी (बांकी) शामिल हैं. 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में इन विधायकों ने पार्टी निर्देशों का पालन न करने का आरोप झेला. ओडिशा की चार सीटों पर भाजपा ने दो, बीजेडी को एक और निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय को एक सीट मिली. क्रॉस वोटिंग की अफवाहों ने राज्य की सियासत को गरमा दिया था. बीजेडी के आठ विधायकों पर संदेह जताया गया था, लेकिन छह पर कार्रवाई हुई.
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पार्टी अनुशासन को मजबूत करने की कवायद
बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक ने बयान जारी कर कहा कि पार्टी संविधान सदस्यों से अटूट निष्ठा की मांग करता है. उन्होंने कहा, 'यह कदम पार्टी की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए जरूरी था.' पटनायक के नेतृत्व में राजनीतिक मामलों की समिति ने विधायकों के स्पष्टीकरणों की गहन समीक्षा की. अनुशासन समिति ने इन्हें दल-विरोधी करार दिया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बीजेडी की आंतरिक मजबूती का प्रतीक है. पटनायक की सधी हुई रणनीति ने विपक्षी खेमे में सनसनी फैला दी.