बिहार SIR पर बड़ा अपडेट, चुनाव आयोग का दावा- 98 फीसदी वोटर्स जमा करा चुके डॉक्यूमेंट्स

Bihar SIR Election Commission: भारतीय चुनाव आयोग ने बिहार में SIR को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। 98 प्रतिशत मतदाताओं के डॉक्यूमेंट जमा होने का दावा किया गया है। साथ ही बताया गया है कि 12 राजनीतिक दलों में से कितने दलों के BLO ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं?

Bihar SIR | Election Commission | Special Intensive Revision

चुनाव आयोग बिहार की वोटर लिस्ट अपडेट करने के लिए SIR कर रहा है।

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Bihar SIR Latest Update: बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने बड़ा अपडेट दिया है। चुनाव आयोग ने दावा किया है कि बिहार के 7.24 करोड़ मतदाताओं में से 98 प्रतिशत वोटर्स अपने डॉक्यूमेंट्स जमा कर सकते हैं और यह आंकड़ा 65 लाख कटने वाले मतदाताओं से अलग है। बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से मिली के अनुसार, 98.2% मतदाताओं के दस्तावेज प्राप्त हो चुके हैं। 0.16% दावे और आपत्तियां मिली हैं। बिहार के 12 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के 10 आपत्तियां मिली हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मान्य किया आधार कार्ड

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त को बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार का वोटर बनने के लिए आधार कार्ड को भी मान्य कर दिया है। आधार कार्ड और वोटर ID के अलावा 11 डॉक्यूमेंट्स के आधार पर ही वोटर लिस्ट में नाम छोड़े जा रहे थे, लेकिन विपक्षी दलों ने सवाल उठाए तो सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को मान्यता दे दी। साथ ही बिहार के सभी रजिस्टर्ड 12 राजनीतिक दलों को निर्देश दिया है कि वे BLO को चुनाव आयोग को सहयोग करने के लिए कहें, ताकि SIR जल्दी पूरा हो।

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24 जून को शुरू हुआ था बिहार SIR

बता दें कि बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वोटर लिस्ट अपडेट की जा रही है। नए वोटर्स को नाम जोड़े जा रहे हैं और मृत वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं। डॉक्यूमेंट्स के आधार पर अवैध वोटरों के नाम भी हटाए जा रहे है। इसके लिए 24 जून 2025 को चुनाव आयोग ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू किया, जिसके पहले चरण के तहत एक अगस्त 2025 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई। बिहार के 7.24 करोड़ वोटर्स में से 65 लाख वोटरों के नाम हटाए गए हैं।

विपक्ष ने लगाया वोट चोरी का आरोप

वहीं बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और 65 लाख नाम हटाए जाने पर विपक्षी दल RJD और कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA ब्लॉक ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी ने कड़ा विरोध जताते हुए SIR के जरिए वोट चोरी का आरोप BJP और चुनाव आयोग पर लगाया। अल्पसंख्यक और दलित समुदाय के लोगों को वोटिंग के अधिकार से वंचित करने की साजिश बताया, जबकि चुनाव आयोग ने दावा किया है कि यह निष्पक्ष प्रक्रिया है, जो हर 5 साल में की जाती है।

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30 सितंबर को आएगी फाइनल लिस्ट

चुनाव आयोग ने दावा किया है कि बिहार में SIR की प्रक्रिया से बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) और जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) जुड़े हैं। इन अधिकारियों ने घर-घर जाकर वोटरों के ID प्रूफ चेक करके वोटर लिस्ट बनाई है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर आपत्तियां और दावे मांगे गए हैं। एक सितंबर तक का समय इसके लिए दिया गया है। SIR 30 सितंबर 2025 तक पूरा होगा, जिसके बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी। वोट चोरी के आरोप निराधार हैं।

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