हाईवे प्रोजेक्ट से जुड़ी मुख्य जानकारी:

  • NHAI के निर्देश पर अब हाईवे और एक्सप्रेसवे के किनारे गाड़ियों को ठीक करने के गैराज खोले जाएंगे.
  • यह सुविधा नेशनल हाईवे के किनारे बने सभी वे-साइड अमेनिटीज (WSA) सेंटर्स पर उपलब्ध कराई जाएगी.
  • एक्सप्रेसवे और हाईवे पर आमतौर पर यह सभी अमेनिटीज सेंटर्स हर 40 से 60 किलोमीटर पर बने होते हैं.
  • देशभर के प्रमुख मार्गों पर ऐसे 700 से अधिक वे-साइड अमेनिटीज सेंटर्स बनाने का लक्ष्य रखा गया है.
  • वर्तमान में 134 से ज्यादा सेंटर्स पूरी तरह काम कर रहे हैं और 511 प्रोजेक्ट्स अलॉट हो चुके हैं.

NHAI Project: हाईवे और एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है. देश में एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे का नेटवर्क बहुत तेजी से बड़ा हो रहा है. इन बेहतरीन सड़कों ने लोगों के सफर को काफी आसान और तेज बना दिया है, लेकिन कई बार वाहन चालकों को बीच रास्ते में बड़ी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है. सफर के दौरान सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब चलती गाड़ी अचानक खराब हो जाती है या पंचर हो जाती है. सुनसान रास्तों पर तकनीकी मदद मिलना एक बड़ी चुनौती बन जाता है. इसी परेशानी को दूर करने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने एक बहुत शानदार तैयारी की है, जिससे अब ड्राइवरों को बीच रास्ते में परेशान नहीं होना पड़ेगा.

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NHAI ने जारी किए सख्त निर्देश

वाहन चालकों को इस बड़ी मुसीबत से बचाने के लिए NHAI की सहयोगी कंपनी नेशनल हाईवेज लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) ने एक बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने अपने सभी फील्ड ऑफिसों को कड़े निर्देश दिए हैं कि नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे के किनारे बन रहे सभी वे-साइड अमेनिटीज (WSA) सेंटर्स पर गाड़ियों की मरम्मत और पंचर ठीक करने की दुकानें अनिवार्य रूप से शुरू की जाएं. ये अमेनिटीज सेंटर्स आमतौर पर हाईवे के किनारे हर 40 से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होते हैं, जहां अब वाहन चालकों को तुरंत रोड साइड गैराज की सुविधा मिल सकेगी.

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पसीने छुड़ाने वाली दिक्कतों से मिलेगी मुक्ति

पिछले काफी समय से एक्सप्रेसवे पर चलने वाले लोगों ने शिकायत की थी कि एक्सेस कंट्रोल्ड रास्तों पर गाड़ी पंचर या खराब होने पर उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है. रात के समय सुनसान रास्तों पर यह समस्या और ज्यादा खतरनाक और परेशान करने वाली हो जाती है. इसी को ध्यान में रखते हुए अब इन चार हेक्टेयर में फैले विशाल सेंटर्स पर सुधार किया जा रहा है. इन सेंटर्स पर पहले से ही रेस्टोरेंट, पेट्रोल पंप, टॉयलेट, ईवी चार्जिंग स्टेशन और ट्रक ड्राइवरों के लिए रुकने की व्यवस्था जैसी जरूरी सुविधाएं मिलती हैं, और अब इनमें मैकेनिक की दुकान भी जुड़ जाएगी.

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पीपीपी मॉडल के तहत तेजी से बन रहे हैं 700 से ज्यादा सेंटर

सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक बड़ा लक्ष्य तय किया है. इस योजना के तहत देशभर के प्रमुख हाईवे और एक्सप्रेसवे पर 700 से ज्यादा वे-साइड अमेनिटीज सेंटर्स शुरू करने की तैयारी है. अच्छी बात यह है कि इनमें से लगभग 134 सेंटर्स पर काम शुरू भी हो चुका है, जबकि 511 प्रोजेक्ट्स का काम कंपनियों को सौंप दिया गया है. इसके अलावा बचे हुए 56 नए सेंटर्स के लिए भी जल्द ही बोली लगाई जाएगी. इन सभी सेंटर्स को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के आधार पर प्राइवेट कंपनियों की मदद से तैयार किया जा रहा है.

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वाहन चालकों को मिलने वाले मुख्य फायदे:

  • बीच सफर में गाड़ी पंचर होने या अचानक तकनीकी खराबी आने पर अब लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
  • सुनसान रास्तों पर खासकर रात के समय गाड़ी खराब होने की स्थिति में यात्रियों को तुरंत मदद मिल सकेगी.
  • एक ही सेंटर पर लोगों को खाना, पेट्रोल, गाड़ियों की चार्जिंग के साथ अब मैकेनिक की सर्विस भी मिलेगी.
  • एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे पर फंसे चालकों को अब मदद के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और समय बचेगा.
  • इन सुरक्षित सेंटर्स पर गैराज होने से एक्सप्रेसवे और हाईवे पर सफर करना पहले से ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा.