Bharat Mandapam: नई दिल्ली का 'भारत मंडपम' एक बार फिर ग्लोबल डिप्लोमेसी का सेंटर बन गया है, क्योंकि यहां सितंबर 2026 के दूसरे हफ्ते में 18वां ब्रिक्स समिट हो रहा है. प्रगति मैदान कॉम्प्लेक्स में मौजूद ये वेन्यू, ब्रिक्स के एक्सटेंडेड ग्रुप के नेताओं और सीनियर डेलीगेशन की मेजबानी कर रहा है. भारत इस शिखर सम्मेलन का इस्तेमाल ट्रेड, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, फाइनेंस और ग्लोबल गवर्नेंस जैसे फील्ड में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कर रहा है. लेकिन 'भारत मंडपम' सिर्फ एक मॉडर्न कंवेंशन सेंटर नहीं है. इसकी कहानी दिल्ली के ऐतिहासिक प्रगति मैदान के मेकओवर से जुड़ी है.

(Photo-PTI)

भारत मंडपम क्या है?

'भारत मंडपम' एक इंटरनेशनल एग्जिबिशन-कम-कन्वेंशन सेंटर (IECC) है, जिसे एक बड़े नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के तौर पर डेवलप किया गया है. पीएम नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई 2023 को इस नए कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया था. ये प्रोजेक्ट तकरीबन 2700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनाया गया था और इसका मकसद भारत को इंटरनेशनल मीटिंग्स, एग्जिबिशन और बिजनेस इवेंट्स के लिए एक अहम सेंटर के तौर पर पहचान दिलाना था. ये कॉम्प्लेक्स तकरीबन 123 एकड़ में फैला है और इसके आर्किटेक्चर में भारतीय संस्कृति की झलक मिलती है, जिसमें नटराज की एक बड़ी मूर्ति और भारत की विरासत से इंस्पायर्ड डिजाइन शामिल हैं.

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(Photo-PTI)

भारत मंडपम का डिजाइन किसने तैयार किया?

इस नए बने कॉम्प्लेक्स का डिजाइन सिंगापुर की कंपनी Aedas के साथ मिलकर Arcop Associates ने तैयार किया था, जबकि इसके निर्माण और काम को पूरा करने में NBCC और दूसरी एजेंसियों ने हिस्सा लिया. इस बिल्डिंग को मशहूर 'हॉल ऑफ नेशंस' से अलग समझना जरूरी है, जो कभी प्रगति मैदान का हिस्सा था. टूट चुकी इस बिल्डिंग का डिजाइन मशहूर भारतीय आर्किटेक्ट राज रेवल ने तैयार किया था. भारत मंडपम अब उस नए बने इलाके के एक हिस्से में है जहां पहले पुरानी इमारतें हुआ करती थीं.

(Photo-PTI)

G20 से हुआ ग्लोबल डेब्यू

भारत मंडपम को दुनिया भर में तब पहचान मिली जब इसने सितंबर 2023 में 18वें G20 लीडर्स समिट की मेजबानी की. पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन समेत दुनिया भर के नेताओं ने इस अहम मीटिंग में हिस्सा लिया. ये शिखर सम्मेलन इसलिए भी अहम था क्योंकि भारत की अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकन यूनियन को G20 का स्थायी सदस्य बनाया गया था. ये शिखर सम्मेलन इसलिए भी अहम था क्योंकि भारत की अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकन यूनियन को G20 का स्थायी सदस्य बनाया गया था. इसके अलावा यहां हर साल इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर भी ऑर्गेनाइज किया जाता है.

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प्रगति मैदान से भारत मंडपम तक

प्रगति मैदान का उद्घाटन 1972 में 'एशिया 72' के नाम से मशहूर इंटरनेशनल ट्रेड फेयर से पहले किया गया था. कई दशकों तक, यह दिल्ली की सबसे जानी-मानी एग्जिबिशन जगहों में से एक रहा, जहां ट्रेड फेयर, बुक फेयर, ऑटोमोबाइल एग्जिबिशन और कई पब्लिक इवेंट्स होते रहे. हालांकि, इसका ज्यादातर इंफ्रास्ट्रक्चर पुराना और जर्जर हो चुका था. भारत को एक ऐसी मॉडर्न फैसिलिटी की जरूरत थी जो एक ही जगह पर बड़े इंटरनेशनल कन्वेंशन, एग्जिबिशन और डिप्लोमैटिक इवेंट्स को आयोजित कर सके.

(Photo-Wikipedia)

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प्रगति मैदान का रीडेवलपमेंट क्यों किया गया?

इस रीडेवलपमेंट का मकसद पुराने हो चुके एग्जिबिशन कॉम्प्लेक्स को मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंस और एग्जिबिशन (MICE) के लिए एक वर्ल्ड-क्लास डेस्टिनेशन में बदलना था. नए रूप में तैयार प्रगति मैदान को मॉडर्न एग्जिबिशन हॉल, बड़ी मीटिंग की जगहें, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और ऐसी सुविधाओं के साथ डिजाइन किया गया था जो बड़े इंटरनेशनल आयोजनों की मेजबानी कर सकें. आज भारत मंडपम उसी बदलाव को दिखाता है.

(PTI File Photo)

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