भारत अपना स्वतंत्रता दिवस हर साल 15 अगस्त को मनाता है. देश के प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराते है और देश को संबोधित करते हैं. शनिवार को स्वातंत्रता दिवस के मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसी परंपरा का पालन करते हुए लाल किले के प्राचीर से तिरंगा फहराया. हालांकि बहुत कम लोग जानते होंगे कि आजादी के जश्न की तारीफ हमेशा से 15 अगस्त नहीं थी. 1947 से पहले आजादी की लड़ाई के दौरान भारत का ‘स्वतंत्रता दिवस’ 15 अगस्त नहीं, बल्कि 26 जनवरी हुआ करता था.
26 जनवरी को मनाया गया था स्वतंत्रता दिवस
जी हां, आजादी मिलने से करीब 17 साल पहले, 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पहली बार पूर्ण स्वतंत्रता यानी ‘पूर्ण स्वराज’ के लक्ष्य के साथ इस दिन को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया था. 1920 के दशक के आखिर में कांग्रेस के भीतर इस बात को लेकर बहस चल रही थी कि भारत को ब्रिटिश शासन से किस तरह की आजादी चाहिए. एक धड़ा ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर डोमिनियन स्टेटस के पक्ष में था, जबकि जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेता पूर्ण स्वतंत्रता की मांग कर रहे थे.
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क्या था 1927 का मद्रास अधिवेशन?
1927 के मद्रास अधिवेशन में कांग्रेस का रुख पूर्ण स्वतंत्रता की ओर बढ़ा, लेकिन अगले साल एक समझौते के तहत ब्रिटेन को भारत को डोमिनियन स्टेटस देने के लिए समय दिया गया. जब ब्रिटिश सरकार की तरफ से कोई रिएक्शन नहीं आया तो कांग्रेस ने अपना रुख स्पष्ट कर लिया. दिसंबर 1929 में लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की, इसी अधिवेशन में कांग्रेस ने ‘पूर्ण स्वराज’ का प्रस्ताव पारित किया और तय किया कि भारत का अंतिम लक्ष्य अब पूर्ण स्वतंत्रता होगा. इसके बाद देशभर में इस संकल्प को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए 26 जनवरी 1930 की तारीख चुनी गई.
26 जनवरी को देशभर में मनाया गया ‘स्वतंत्रता दिवस’
इसी के तहत 26 जनवरी 1930 को देश के अलग-अलग हिस्सों में तिरंगा फहराया गया, सभाएं हुईं और लोगों ने पूर्ण स्वराज का संकल्प लिया. मद्रास यानी आज के चेन्नई में कई स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और जुलूस निकाले गए. हालांकि उस समय भारत कानूनी रूप से स्वतंत्र नहीं हुआ था और ब्रिटिश शासन कायम था, लेकिन राजनीतिक तौर पर यह दिन भारतीयों की स्वतंत्रता की सार्वजनिक घोषणा बन गया.
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15 अगस्त ही क्यों बना आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस?
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की स्थिति कमजोर हुई और अंग्रेजों ने भारत को आजाद करने का फैसला लिया. ब्रिटिश संसद ने इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट, 1947 पारित किया, जिसके तहत भारत और पाकिस्तान को स्वतंत्र देश बनाया जाना था. कानून में 15 अगस्त 1947 को सत्ता हस्तांतरण की निर्धारित तारीख बनाया गया, जिसके बाद पहली बार आजाद भारत का स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मनाया गया और मनाया जाता रहा है.
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