सफल नहीं हुआ ISRO का मिशन, अब रॉकेट और 16 सैटेलाइट्स कहां जाएंगे?
Author: Varsha Sikri
2026-01-13 12:07:29
इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने सोमवार को 2026 की पहले ऑर्बिटल मिशन की सफल लॉन्चिंग की, लेकिन सैटेलाइट तैनात नहीं हो पाए. PSLV C62 रॉकेट ने श्री हरिकोटा से अपनी 64वीं उड़ान भरी. इसमें EOS-N1 अन्वेषा समेत 16 सैटेलाइट भी डिप्लॉय की गई थी. अन्वेषा को सैटेलाइट एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन एप्लीकेशन के लिए तैयार किया था. लेकिन सैटेलाइट्स लॉन्च के कुछ देर बाद ही अपना रास्ता भटक गई. ISRO चीफ डॉ. वी नारायणन ने कहा कि रॉकेट लॉन्चिंग के तीसरे चरण में गड़बड़ी आ गई, जिसकी वजह से उसने दिशा बदल दी. अब सवाल ये उठता है कि इस तरह मिशन फेल होने के बाद रॉकेट और सैटेलाइट का क्या होता है? चलिए इस बारे में हम आपको विस्तार से समझाते हैं.
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रास्ता भटकने के बाद रॉकेट का क्या होता है?
रॉकेट में ऑनबोर्ड कंप्यूटर और सुरक्षा सिस्टम फिट किया जाता है जो उसकी दिशा, स्पीड और ऊंचाई पर नजर रखने में मदद करता है. अगर रॉकेट रास्ता बदलकर जमीन या आबादी की तरफ जाता है तो रेंज सेफ्टी ऑफिसर उसे टर्मिनेट कर सकता है. अगर ज्यादा ऊंचाई पर रॉकेट में कोई खराबी आती है तो उसके टुकड़े समुद्र में गिर जाते हैं. कई मामलों में रॉकेट को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है.
16 सैटेलाइट्स का क्या होगा?
सैटेलाइट अलग होने से पहले अगर खराबी आती है तो वो रॉकेट के साथ ही नष्ट हो जाते हैं. अगर सैटेलाइट ऑनबोर्ड सिस्टम से खुद को कंट्रोल कर सके तो ऑर्बिट सुधारने की कोशिश की जाती है. लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो मिशन अबॉर्ट कर दिया जाता है. सैटेलाइट कुछ समय बाद वायुमंडल में जलकर खत्म हो सकते हैं. जो सैटेलाइट पूरी तरह नहीं जल पाते, उन्हें समुद्र के एक सुनसान हिस्से में गिराया जाता है जिसे पॉइंट नेमो कहते हैं. ये प्रशांत महासागर का वो हिस्सा है जो जमीन से सबसे ज्यादा दूर है.
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