बाबा रामदेव ने आचार्य बालकृष्ण संग खेली होली, पतंजलि विश्वविद्यालय से दी ये सीख

होली के पावन अवसर पर पतंजलि विश्वविद्यालय के खेल प्रांगण में ‘होलीकोत्सव यज्ञ एवं फूलों की होली’ का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव जी और कुलपति आचार्य बालकृष्ण जी ने इस समारोह में हिस्सा लिया। इसे एक नई परंपरा की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां संस्कृति, योग और सामाजिक सद्भाव को महत्वपूर्ण माना जाता है।

Baba Ramdev Holi
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Baba Ramdev Acharya Balkrishna Holi Celebration 2025: होली के पावन अवसर पर पतंजलि विश्वविद्यालय के खेल प्रांगण में ‘होलीकोत्सव यज्ञ एवं फूलों की होली’ का आयोजन किया गया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव जी तथा कुलपति आचार्य बालकृष्ण जी भी मौजूद रहे। रंगों के इस खास पर्व पर ऋषिद्वय ने सभी देशवासियों को वासंती नवसस्येष्टि की शुभकामनाएं दीं।

बुराई पर अच्छाई की जीत का भी प्रतीक

पतंजलि विश्वविद्यालय में आयोजित होलीकोत्सव पर स्वामी रामदेव जी ने कहा कि होली न केवल रंगों व उल्लास का पर्व है, बल्कि सामाजिक समरसता, प्रेम, भाईचारे और बुराई पर अच्छाई की जीत का भी प्रतीक है। हम होली पर प्रण लें कि हमारे भीतर आत्मग्लानि, आत्मविस्मृति, आत्मसम्मोहन आदि न आए। हम सदा सत्य में आरूढ़ रहते हुए अपने सत्य पथ पर, सनातन पथ पर, वेद पथ पर, ऋषि पथ पर, सात्विकता के पथ पर आगे बढ़ते रहें।

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Baba Ramdev Holi Patanjali University holi

योग व यज्ञ के साथ मनाएं त्योहार

स्वामी रामदेव ने कहा कि सनातन संस्कृति के प्रत्येक पर्व को हम योग व यज्ञ के साथ मनाते हैं। योग व यज्ञ हमारी सनातन संस्कृति के प्राण तत्व हैं, आत्म तत्व हैं। स्वामी जी ने सभी देशवासियों से आह्वान किया कि इस सौहार्द को भांग व शराब के नशे में बिगड़ने न दें। यह समाज के लिए हानिकारक है।

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होली पूर्ण सात्विकता से मनाएं

आचार्य बालकृष्ण जी का कहना है कि होली अहंकार के त्याग का पर्व है। होलीकात्सव पर आचार्य ने कहा कि होली अपने अंदर के हिरण्यकश्यप को होलिका में दहन करने का पर्व है। होली पर सभी आपसी मतभेदों को भूल कर भाईचारे के रंग में रंगकर इस पावन पर्व को सार्थक बनाएं। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि होली पर्व पूर्ण सात्विकता के साथ मनाएं।

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होली पर बरतें सावधानी

आचार्य बालकृष्ण जी का कहना है कि होली पर गोबर, कीचड़ तथा कैमिकल युक्त रंगों का प्रयोग न करें। फूलों तथा हर्बल गुलाल से ही होली खेलें। कैमिकल्स युक्त रंगों से नेत्र तथा त्वचा रोग होने की प्रबल सम्भावना रहती है। साथ ही आचार्य जी ने होली खेलने से पूर्व कुछ सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि होली खेलने से पहले अपने शरीर के खुले हिस्सों पर सरसों या नारियल का तेल अथवा कोल्ड क्रीम लगाएं, इससे रसायनयुक्त हानिकारक रंगों से त्वचा खराब होने की संभावना कम हो जाती है।

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कौन-कौन रहा उपस्थित?

इस कार्यक्रम में पतंजलि विश्वविद्यालय के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ-साथ पतंजलि संस्थान से सम्बद्ध सभी ईकाइयों के ईकाई प्रमुख, विभागाध्यक्ष, कर्मचारीगण, शैक्षणिक संस्थानों के प्राचार्यगण, शिक्षकगण, विद्यार्थीगण, कर्मचारीगण, संन्यासी भाई व साध्वी बहनें भी उपस्थित रहे।

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