कानपुर के किडनी कांड में अब एक और नया मोड़ सामने आया है. शुरूआत में मजबूरी में किडनी बेचने वाला बताकर सुर्खियों में आए आयुष की कहानी अब पलटती हुई दिखाई दे रही है. जो कहानी अब तक सामने थी वह दर्द और मजबूरी से भरी हुई थी, लेकिन अब जो जानकारी आयुष के गांव से निकलकर सामने आई वो आयुष की पोल खोल रहा है.

आयुष ने पुलिस को बताया था कि उसने फीस जमा करने के लिए किडनी बेच दी तो यह कहानी तेजी से सोशल मीडिया पर लोगों के बीच वायरल हो गई. लेकिन अब जब कानपुर किडनी मामले की जांच आगे बढ़ी तो कई नई तस्वीरें सामने आने लगी हैं. गांव के लोगों और परिवार से जो जानकारी सामने आई, उसने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या सच में आयुष मजबूर में ये सब कर रहा था या फिर उसने अपनी जिंदगी के फैसले खुद लिए और अब उसे मजबूरी का नाम दिया?

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गांव के लोगों ने क्या बताया?

अब इस मामले में आयुष के गांव और परिवार के लोगों के हवाले कुछ नई जानकारियां सामने आई हैं. जिसके बाद इस मामले की दिशा ही बदल गई है. बता दें कि आयुष बेगूसराय जिले के भगवानपुर प्रखंड के औगान गांव का रहने वाला है. गांव में उसका परिवार कभी अच्छी स्थिति में था. उसके पिता राजेश चौधरी जमीनदार थे और दोनों बेटों को पढ़ाकर आगे बढ़ाना चाहते थे. 2015 में जब आयुष ने इंटर पास किया तो परिवार की उम्मीदें उससे कुछ ज्यादा ही बढ़ गईं. आयुष के पिता ने आयुष को डॉक्टर बनाने का सपना देखा और विशाखापट्टनम के एक कोचिंग संस्थान में दाखिला दिलाया.

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पढ़ाई के दौरान हुई थी लड़की से मुलाकात

कोचिंग संस्थान में दाखिल होने के बाद ही आयुष की जिंदगी और कहानी दोनों में एक नया मोड आया. मिली जानकारी के अनुसार, उसकी मुलाकात एक लड़की से हुई धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया. गांव के लोगों के अनुसार, इसके बाद आयुष का मन पढ़ाई में लगा ही नहीं और वह बार-बार घर आने लगा.

पिता ने कर ली आत्महत्या

बता दें कि साल 2017 में आयुष के पिता ने आत्महत्या कर ली थी. इस हादसे ने पूरे परिवार को झकझोर दिया. आमतौर पर पिता की मृत्यु के बाद बेटों पर जिम्मेदारी बढ़ जाती है लेकिन आयुष अपने पिता की मृत्यु के बाद और भी ज्यादा लापरवाह हो गया.

आयुष ने बेची 15 बीघा जमीन

गांव के लोगों ने बताया कि आयुष ने पिता की मृत्यु के कुछ महीनों बाद ही अपने हिस्से की जमीन बेचनी शुरू कर दी. करीब 15 बीघा जमीन धीरे-धीरे बिक गई. यह वही जमीन थी जिसे पहले गिरवी बताकर आयुष ने अपनी मजबूरी की कहानी गढ़ी थी. लेकिन अब सामने ये आया है कि जमीन न सिर्फ गिरवी थी बल्कि उसे खुद आयुष ने ही बेच कर उसके पैसे खर्च कर दिए थे.

एयर होस्टेस से आयुष ने की शादी, फिर अलगाव

इसी दौरान आयुष की जिंदगी में एक और बड़ा मोड़ आया. आयुष को यूपी की रहने वाली एक एयर होस्टेस से प्यार हुआ और उनके बीच रिश्ता बना. साल 2018 में आयुष उसे अपने गांव लेकर आया. कुछ दिनों तक दोनों साथ रहे, फिर सामाजिक दबाव में देवघर जाकर दोनों ने शादी कर ली. शादी की शुरुआती महीनों में तो सब कुछ ठीक रहा, लेकिन फिर यह रिश्ता ज्यादा दिन तक नहीं चल सका. शादी के करीब तीन महीने बाद ही आयुष की पत्नी उसे छोड़कर चली गई और फिर कभी वापस नहीं आई.

गांव के लोगों ने यह भी बताया कि इसी दौरान आयुष ने जमीन बेचकर मिले पैसों को खूब खर्च किया. दोस्तों की मंडली, घूमना फिरना और खूब खर्चा करना.. ये उसका रूटीन बन गया. वह गांव में कहता रहा कि वह बाहर पढ़ाई कर रहा है लेकिन असली कहानी कुछ और ही थी. साल 2021 के बाद आयुष अपने गांव लौटा ही नहीं. एक बार जब वह वापस आया तो छोटे भाई ने उसे अपने घर में रखने से मना कर दिया. इसके बाद आयुष ने गांव से सारे रिश्ते ही खत्म कर लिए. आज की हालत यह है कि गांव में उसकी विधवा मां अकेले रहती हैं और लोगों के बीच आयुष का नाम लेना भी पसंद नहीं किया जाता है.