Astra Missile: भविष्य के युद्धों और देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रक्षा मंत्रालय ने एक बेहद बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है. भारत अपनी सबसे ताकतवर स्वदेशी एयर-टू-एयर (हवा से हवा में मार करने वाली) 'अस्त्र' मिसाइल का उत्पादन अब बड़े स्तर पर बढ़ाने जा रहा है. इसके लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) एक विशाल औद्योगिक नेटवर्क तैयार कर रहा है.
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अब तक अस्त्र मिसाइल का निर्माण मुख्य रूप से सरकारी कंपनी भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) करती आई है. लेकिन अब देश की सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए DRDO इस मिशन में सरकारी कंपनियों के साथ-साथ प्राइवेट डिफेंस कंपनियों और MSME सेक्टर को भी अपने साथ जोड़ेगा. इसका सीधा मकसद यह है कि जरूरत पड़ने पर बहुत ही कम समय में भारी तादाद में मिसाइलों का निर्माण तेजी से किया जा सके.
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मिडिल ईस्ट के युद्ध से लिया सबक
DRDO के सूत्रों ने न्यूज़ 24 को बताया कि मिडिल ईस्ट में चल रहे मौजूदा युद्ध ने दुनिया के सामने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक लड़ाई में सिर्फ फाइटर प्लेन ही काफी नहीं हैं, बल्कि खतरनाक और सटीक मिसाइलों की भूमिका सबसे बड़ी होती है. इसी को भांपते हुए भारत ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है.
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क्यों बेहद खास और घातक है अस्त्र मिसाइल?
'अस्त्र' भारत की पहली स्वदेशी बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल है, जो बिना देखे भी दुश्मन के फाइटर जेट को हवा में ही ढेरों किलोमीटर दूर ध्वस्त कर सकती है. इसकी खासियतों पर नजर डालें तो:
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- लंबी दूरी तक अचूक मार: अस्त्र Mk1 की रेंज जहां 110 किलोमीटर है, वहीं नए और आधुनिक अस्त्र Mk2 की मारक क्षमता लगभग 160 किलोमीटर तक पहुंच जाएगी.
- ध्वनि से साढ़े चार गुना रफ्तार: यह मिसाइल Mach 4.5 की हैरतअंगेज रफ्तार से उड़ती है, यानी आवाज की गति से भी साढ़े चार गुना तेज. दुश्मन को संभलने का मौका ही नहीं मिलता.
- अत्याधुनिक सीकर और जैमिंग रोधी तकनीक: इसमें लगी आधुनिक सीकर तकनीक दुश्मन के विमान को बहुत दूर से ट्रैक कर लेती है. साथ ही, यह भारी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बीच भी अपने लक्ष्य को लॉक करके सटीक हमला करने में सक्षम है.
- ड्यूल-पल्स रॉकेट मोटर: अस्त्र Mk2 में ड्यूल-पल्स रॉकेट मोटर का इस्तेमाल किया गया है, जो इसकी मारक क्षमता और घातकता को दोगुना कर देती है.
फिलहाल इस मिसाइल को भारतीय वायुसेना के सबसे भरोसेमंद सुखोई (Su-30MKI) लड़ाकू विमानों में शामिल किया जा चुका है, और अब इसे पूरी तरह स्वदेशी 'तेजस' फाइटर जेट पर भी इंटीग्रेट करने का काम तेजी से चल रहा है. इस नए कदम से भारत रक्षा क्षेत्र में न सिर्फ आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि आसमान में उसकी ताकत अजेय हो जाएगी.
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