केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को डिजिटल प्लेटफॉर्मों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट क्रिएटर्स के साथ फेयर रेवेन्यू शेयर करना होगा, अन्यथा कानूनी तंत्र हस्तक्षेप करेगा. डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) कॉन्क्लेव 2026 को संबोधित देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मीडिया जगत एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहां ट्रस्ट की कमी, डीपफेक, सिंथेटिक कंटेंट और एल्गोरिदम-चालित इकोसिस्टम जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं. ऐसे में प्लेटफॉर्म्स अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते, क्योंकि जब यह ट्रस्ट कमजोर होता है तो समाज की नींव हिल जाती है.
जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते डिजिटल प्लेटफार्म
वैष्णव ने स्पष्ट शब्दों में कहा, इंटरनेट अब केवल सूचना साझा करने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह एक शक्तिशाली मीडिया इकोसिस्टम बन चुका है. ऐसे में प्लेटफॉर्म्स अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते. प्लेटफॉर्म्स को अब जागना होगा और यह समझना होगा कि मानव समाज ने हजारों वर्षों में जिन संस्थाओं का निर्माण किया है, उनमें विश्वास को मजबूत करना कितना महत्वपूर्ण है. प्लेटफॉर्म्स को अपने यहां होस्ट किए जा रहे कंटेंट की जिम्मेदारी लेनी होगी. AI जेनरेटेड सिंथेटिक कंटेंट और डीपफेक समाज की नींव को हिला रहे हैं. अगर एल्गोरिदम के जरिए गलत कंटेंट फैलाया जा रहा है या बच्चों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है तो इसकी जवाबदेही प्लेटफॉर्म की होगी.
कमाई का सही हक मिलना जरूरी
अश्विनी वैष्णव ने सबसे ज्यादा जोर फेयर रेवेन्यू शेयरिंग पर दिया. उन्होंने कहा कि प्लेटफॉर्म्स को उन लोगों के साथ राजस्व का निष्पक्ष बंटवारा करना चाहिए जो कंटेंट क्रिएट करते हैं – चाहे वे न्यूज पर्सन्स हों, पारंपरिक मीडिया, दूर-दराज इलाकों में बैठे क्रिएटर्स, इन्फ्लुएंसर्स, प्रोफेसर्स या रिसर्चर्स. यदि ऑरिजिनल कंटेंट बनाने वालों को उचित पैसा नहीं मिलेगा, तो विज्ञान, कला और साहित्य का विकास रुक जाएगा. वैष्णव ने प्लेटफॉर्म्स से रेवेन्यू शेयरिंग पॉलिसी पर पुनर्विचार की अपील करते हुए कहा कि यदि वे स्वेच्छा से ऐसा नहीं करते तो दुनिया के कई देशों ने कानूनी रास्ता दिखाया है और हम उस पर विचार कर सकते हैं.
ऑनलाइन सेफ्टी और बच्चों की सुरक्षा पर भी जोर
रेवेन्यू के अलावा वैष्णव ने बच्चों की सुरक्षा, साइबर फ्रॉड रोकने, सिंथेटिक कंटेंट के लिए अनिवार्य सहमति और एल्गोरिदम की जिम्मेदारी पर बल दिया. उन्होंने कहा कि बिना सहमति के किसी न्यूज एंकर का प्रोडक्ट प्रमोट करने वाला वीडियो कैसे बन सकता है? सहमति जरूरी है.’ उन्होंने कहा कि अब सिर्फ एक्जीक्यूटिव नहीं, ज्यूडिशियरी और संसदीय समितियां भी डिजिटल मीडिया के प्रभाव की जांच कर रही हैं. अश्विनी वैष्णव ने इसे ‘मीडिया की दुनिया का इन्फ्लेक्शन पॉइंट” बताया और कहा कि आज के फैसले कल की नींव रखेंगे.
संबंधित खबरें
'मार्च करें और थोड़ी सी शॉपिंग भी कर लें', रैली से पहले राहुल गांधी की अपील
1 hr agoतमिलनाडु में 1800 नीट प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत, CM विजय ने दिया ये आदेश
1 hr agoINDIA ब्लॉक की रैली में शामिल नहीं होगी CJP, अभिजीत दीपके का बड़ा बयान
3 hrs agoनवंबर में कैसे रहेगा मौसम का हाल? IMD ने जारी किया अलर्ट
3 hrs ago'बॉलीवुड में बेटी को लॉन्च करना चाहते हैं डिप्टी PM', पीयूष गोयल का दावा
3 hrs agoबेंगलुरु होटल के पूल में करंट, दो विदेशी नागरिकों की मौत
4 hrs agoजेल से रिहा होते ही ED ने आजम खान को किया गिरफ्तार, कल सुबह कोर्ट में पेशी
5 hrs ago'मॉक संसद' में CEC पर भड़के राहुल गांधी, 2024 के लोकसभा चुनाव को बताया अवैध
6 hrs ago'सरदार के फैसलों ने देश को जोड़ा...', राष्ट्रीय एकता दिवस पर बोले पीएम मोदी
7 hrs agoनागपट्टिनम में मिलीं नटराज और शिवकामी की प्राचीन कांस्य मूर्तियां
8 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines