इंटेरनेशनल बॉर्डर हो या फिर बेहद ही दुर्गम इलाका, जब इंडियन आर्मी नफरी करने जाती है तो हाई कमान को हमेशा डर रहता है कि कही सेना विस्फोटक का शिकार न हो जाये और इस मसले को लेकर रक्षा मंत्रालय कुछ सालों से मंथन भी कर रहा था. लेकिन अब यह कामयाबी मिलने वाली है सेना को हर खतरे से निकालने के लिए, यानी नफरी के वक़्त कहीं कोई खतरा है तो इसकी जानकारी सेना को पहले ही मिल जाएगी.

इंडियन आर्मी मॉडर्न टेक्नोलॉजी से लैस


आपको बता दें कि इंडियन आर्मी बहुत जल्द मॉडर्न टेक्नोलॉजी से लैस हो जाएगी जो मेटल के साथ-साथ प्लास्टिक, लकड़ी और सिरेमिक से बने छिपे विस्फोटकों का भी आसानी से पता लगा सकेगी. डिफेंस मिनिस्टरी ने फोर्स के लिए 386 नई पीढ़ी के ड्यूल टेक्नोलॉजी माइन डिटेक्टर्स खरीदने के लिए करीब 290 करोड़ का बड़ा टेंडर जारी किया है. इसके लिए कई स्वदेशी कंपनी को अपने प्रोफाइल के साथ बुलाया गया है.

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क्यों लिया गया यह फैसला?


लेफ्टिनेंट जनरल विनोद खण्डारे ने न्यूज़ 24 से बातचीत में कहा कि सेना के लिए इस तरह के टेंडर को जारी करना एक अमृत के समान है क्योंकि आतंकवादी देश में घुसपैठ करने के लिए मेटल बारूदी सुरंग की जगह नॉन-मेटेलिक IEDs और माइंस का इस्तेमाल कर रहे हैं और इस तरह के विस्फोटक को ढूंढने में भारतीय सेना को बहुत ही परेशानी होती थी. क्योंकि वर्तमान में इंडियन आर्मी Schiebel और Metex मेटल डिटेक्टरों का इस्तेमाल करती है. ये सिस्टम जमीन के अंदर छिपी मेटल से बनी चीजों को पहचानने में सक्षम है, लेकिन नन मेटल को डिटेक्ट नही कर पाती है.

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क्या है नई तकनीक?


ऐसा कई बार हुआ कि कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में नन मेटलिक विस्फोटक को सेना पकड़ नहीं पाई थी. और इसी खतरे को देखते हुए इंडियन आर्मी ज्यादा से ज्यादा मॉडर्न टेक्नोलॉजी को अपनाने जा रही है. मेजर जनरल राजन कोचर के मुताबिक नई प्रणाली में पारंपरिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक मेटल डिटेक्शन तकनीक के साथ Ground Penetrating Radar या Infrared तकनीक को जोड़ा जाएगा. इससे यह सिस्टम मेटल और नॉन मेटल दोनों प्रकार के विस्फोटकों का पता लगाने में सक्षम होगा.

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हर क्षेत्र में बेहतर डिटेक्शन क्षमता


इससे सैनिकों को बर्फ, रेगिस्तान, दलदली जमीन और पहाड़ी इलाकों में भी बेहतर डिटेक्शन क्षमता मिलेगी. यह सिस्टम 6 सेंटीमीटर तक की छोटी वस्तुओं और 4 सेंटीमीटर ऊंचाई वाले विस्फोटकों को भी पहचान सकेगा. यह सूखी मिट्टी और रेत में यह करीब 12 सेंटीमीटर गहराई तक डिटेक्शन करेगा, जबकि बर्फ, दलदली या खारे इलाकों में 10 सेंटीमीटर तक विस्फोटकों को खोज सकेगा. यह हाईटेक सिस्टम -10°C से लेकर +42°C तक के तापमान में काम करने में सक्षम होगा. सैनिक इसे खड़े होकर, घुटनों के बल बैठकर या लेटकर भी इस्तेमाल कर सकेंगे.

ऑपरेशन मोड में इसका वजन 8 किलोग्राम से कम रखा गया है ताकि सैनिक लंबे समय तक इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकें. इसके अलावा इसमें ऑडियो और विजुअल दोनों तरह के अलार्म होंगे, जिससे अलग-अलग प्रकार के खतरे की पहचान तुरंत हो सकेगी.